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मेयर बनने के लिए सुमन बाला का रास्ता साफ, अदालत ने याचिका खारिज कर रास्ता साफ किया

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
फरीदाबाद, 9 फरवरी: नगर-निगम के वार्ड नंबर-12 से भाजपा पार्षद सुमनबाला के खिलाफ जिला अदालत में दायर स्टे की याचिका रद्द हो गई है। अदालत से स्टे की याचिका रद्द होने के साथ ही मेयर बनने के लिए सुमन बाला का रास्ता साफ हो गया है और कानूनी अड़चन भी समाप्त हो गई है।
उल्लेखनीय है कि बुधवार को जिला अदालत में सुनील कंडेरा नामक व्यक्ति ने एक याचिका दायर की थी। इस याचिका के माध्यम से अदालत से अपील की गई थी कि इस बार नगर-निगम का पद अनुसुचित जाति के पार्षद हेतु आरक्षित है। भाजपा अनुसुचित जाति के लिए आरक्षित वार्ड नंबर-12 से पार्षद बनी सुमनबाला को मेयर बनाना चाहती है। याचिका के जरिए कहा गया कि सुमनबाला अनुसूचित जाति से संबंध नहीं रखती। उनके पिता के नाम के आगे लोकनाथ जुलाहा लिखा हुआ है। इसलिए वह जुलाहा जाति के जरिए एसई होने का लाभ उठाना चाह रहे हैं। इसलिए अदालत सुमनबाला के मेयर बनने पर रोक लगाए।
जिला अदालत की जज गरिमा यादव इस याचिका की सुनवाई कर रही थीं। उन्होंने दोनों पक्षों से जवाब मांगा। भाजपा पार्षद सुमनबाला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी त्रिखा अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत के समक्ष सुमनबाला के 8वीं से लेकर 10वीं कक्षा के पुराने प्रमाणपत्र एवं बाकी सभी दस्तावेज रखे। अदालत को बताया गया कि सुमनबाला के पिता जब पाकिस्तान से आए थे तो वह जुलाहा जाति से संबंध थे। यह जाति हरियाणा सरकार द्वारा अधिसूचित एसई श्रेणी में आती है। सुमनबाला ने पार्षद का चुनाव लडऩे या फिर किसी प्रकार का राजनैतिक लाभ प्राप्त करने के लिए ये दस्तावेज नहीं बनवाए हैं। बल्कि उनके सभी दस्तावेज उनके जन्म से पहले के हैं।
इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा मेयर पद के लिए उनके नाम पर रोक लगाने की अपील सरासर गलत है। न्यायाधीश गरिमा यादव ने दोनों पक्षों की दलील सुनने एवं सभी दस्तावेज देखने के बाद सुमनबाला को मेयर बनाने पर रोक लगाने की याचिका को रद्द कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 6 अप्रैल को होगी। उपरोक्त याचिका के रद्द होने को भाजपा के लिए बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। सुमनबाला को 32 पार्षदों का समर्थन हासिल है और इस कानूनी जीत के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि सुमनबाला के नाम पर मोहर लगनी बाकी है।

 

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