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आखिरकार BJP को हरियाणा में सरकार बनाने की इतनी जल्दी क्यों थी?

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता/शंभूनाथ गौतम की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली/चंडीगढ़, 27 अक्टूबर:
महाराष्ट्र और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को कुछ ज्यादा ही कसरत करवा दी। भाजपा दोनों ही राज्यों में सरकार बनाने के लिए अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं हासिल कर सकी है। बहुमत से चूकने के बाद हरियाणा में बीजेपी को गठबंधन की लाठी लेनी पड़ी है और उसकी लाठी बनी चौटाला परिवार की ही पार्टी जननायक जनता पार्टी यानी जेजेपी। महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था। यहां सरकार बनाने के लिए 145 सीटेें चाहिए। भाजपा और शिवसेना ने 161 सीटें भी जीत ली हैं, इसलिए भाजपा को महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए नतीजों के बाद जल्दी नहीं रही। लेकिन हरियाणा के चुनाव नतीजे भाजपा को अखर गए। हालांकि राज्य में 90 सीटों में से 40 पर बीजेपी ने कब्जा किया जबकि सरकार बनाने के लिए उसको 6 विधायकों की जरूरत और थी।
अब यहीं से ही भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह समेत पार्टी के केंद्रीय आलाकमान हरियाणा में सरकार बनाने के लिए दिन रात एक किए हुए थे। अमित शाह नहीं चाहते थे कि हरियाणा में कांग्रेस कर्नाटक फार्मूले को लागू करके सरकार बना लें और सबसे बड़ी पार्टी भाजपा जोकि 40 सीट जीतकर आई है वह हाथ मलते रह जाए। हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा फिर सक्रिय हुए। सबसे पहले तो भाजपा ने हरियाणा विकास पार्टी के मुखिया गोपाल कांडा समेत निर्दलीयों को अपने साथ मिला लिया। लेकिन सबसे अधिक अमित शाह को हरियाणा चुनाव परिणामों के बाद राजनीति में उभर कर आए जेजेपी के प्रमुख दुष्यंत चौटाला खटक रहे थे। जेजेपी ने इस बार 10 सीटों पर अपना कब्जा जमाया है। भाजपा को डर सता रहा था कि जेजेपी प्रमुख दुष्यंत चौटाला कहीं कांग्रेस पाले में न चले जाएं, इसलिए आनन-फानन में 25 अक्टूबर यानी शुक्रवार को ही दुष्यंत चौटाला के साथ मीटिंग रखी गई जोकि देर रात तक चलती रही। गृहमंत्री शाह अहमदाबाद का अपना दौरा बीच में रद्द करके चंडीगढ़ पहुंचे थे। दुष्यंत चौटाला बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर के साथ अमित शाह से मिलने पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई इसके बाद इस फैसले का एलान किया गया। इसका एक खास कारण निर्दलीय विधायकों द्वारा समर्थन देने के नाम पर भाजपा को ब्लैकमेल करना भी रहा।
बता दें कि इससे पहले जब दुष्यंत चौटाला ने मीडिया से बातचीत की थी तभी उन्होंने इस बात के संकेत दिए थे कि वे बीजेपी को अपना समर्थन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो पार्टी उन्हें सम्मान देगी वे उसके साथ जा सकते हैं। इसके बाद कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दुष्यंत चौटाला को साथ आने का न्योता दिया, लेकिन चौटाला ने बीजेपी के साथ जाने का फैसला लिया है। इस बैठक के बाद अमित शाह ने एलान किया कि राज्य में बीजेपी और जेजेपी मिलकर सरकार बनाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य का सीएम बीजेपी का होगा और जेजेपी को डिप्टी सीएम का पद मिलेगा।
गौरतलब है कि हरियाणा में बीजेपी ने 40 सीटों पर जीत दर्ज की है और जेजेपी के खाते में 10 सीटें आई हैं। ऐसे में दोनों को मिलाकर ये आंकड़ा 50 का होता है। 90 विधानसभा सीटों वाले राज्य हरियाणा में बहुमत का आंकड़ा 46 है। बाद में दुष्यंत चौटाला ने कहा कि राज्य में एक स्थाई सरकार देने के लिए ये जरूरी था कि बीजेपी और जेजेपी साथ आएं। चौटाला ने कहा कि मैं अमित शाह और नड्डा जी का धन्यवाद करता हूं। हमारी पार्टी ने तय किया था कि राज्य की बेहतरी के लिए सरकार का स्थिर होना जरूरी है। गृहमंत्री अमित शाह चुनाव नतीजों के बाद से ही महाराष्ट्र नहीं बल्कि हरियाणा में सरकार बनाने को लेकर कोई मौका छोडऩा नहीं चाहते थे। आखिर में अमित शाह ने हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई, जिसके लिए वह जाने जाते हैं।
हरियाणा में भाजपा-जेजेपी की बनी सरकार, खट्टर ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ और दुष्यंत बने उप-मुख्यमंत्री:-
आखिरकार आज दीपावली के दिन ही भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में जेजेपी के साथ मिलकर अपनी सरकार बना ली। चंडीगढ़ में हुए शपथ ग्रहण समारोह में मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद तो दुष्यंत चौटाला ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली द्य इसी के साथ हरियाणा में जारी सरकार बनाने का गतिरोध भी पटाक्षेप हो गया है। खट्टर और दुष्यंत को हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने शपथ दिलाई। यहां हम आपको बताना चाहेंगे कि आज किसी भी विधायक को मंत्री पद की शपथ नहीं दिलाई गई। इसकी बड़ी वजह भाजपा और जजपा दोनों तरफ से मंत्री चेहरे पर सहमति नहीं बनना माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल समेत कई वरिष्ठ नेता राजभवन में मौजूद रहे लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह मौजूद नहीं रहे। खास बात रही कि आज ही जेल से फरलो पर बाहर आए अजय चौटाला बेटे दुष्यंत के उप-मुख्यमंत्री पद की शपथ के दौरान मौजूद रहे।
मालूम हो कि विधानसभा चुनाव में हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी। भाजपा ने 40 सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस ने 31, दुष्यंत चौटाला की जेजेपी ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की है। सात सीटों पर निर्दलीय विधायकों ने कब्जा जमाया है। भाजपा ने गोपाल कांडा का समर्थन नहीं लिया है।
विपक्ष ने भाजपा को समर्थन देने पर दुष्यंत चौटाला पर लगाए आरोप…:-
जेजेपी द्वारा बीजेपी को समर्थन देने को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। वह दुष्यंत चौटाला पर आरोप लगा रहे हैं कि वह अपने पिता अजय चौटाला को बचाने के लिए बीजेपी को समर्थन दिया है। आज सुबह ही दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला आज तिहाड़ जेल से बाहर आए। उन्हें 14 दिनों का फरलो मिला है। उन्होंने कहा हम तो जेल में हैं। दुष्यंत ने साथियों के सहयोग से 11 महीने में संगठन जेजेपी को खड़ा किया। आज उसने बड़े-बड़े लोगों को हैसियत बता दी। इसकी शुरुआत जींद में हुई। बीजेपी से गठबंधन को लेकर हमसे दुष्यंत की जेल में बात हुई थी। हमने बीजेपी से गठबंधन को मंजूरी दी थी। हम कांग्रेस के साथ नहीं जा सकते, जिसके हम जन्मजात विरोधी हैं, विरोध में ही पैदा हुए हैं।



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