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फरीदाबादहरियाणा

बाल विवाह करना या करवाना दंडनीय अपराध: विक्रम सिंह

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट
Faridabad News, 20 अप्रैल:
जिला उपायुक्त विक्रम सिंह ने कहा कि अक्षय तृतीया पर जिले में बाल विवाह रोकने को लेकर प्रशासन सतर्कता से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह करना या करवाना दंडनीय अपराध है।
किसी भी बालिका, जिसने अपनी आयु 18 वर्ष पूर्ण न की हो एंव किसी भी बालक, जिसने अपनी आयु 21 वर्ष पूर्ण न की हो का विवाह कराया जाना प्रतिबन्धित है।
जिला संरक्षण एंव बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग व आंगनबाड़ी वर्करों के साथ एनआईटी ब्लाक 1 व एनआईटी ब्लॉक 2 में बाल विवाह रोकने बारे बैठक ली गई है। जिसमें उन्होने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अन्तर्गत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है तथा बाल विवाह में प्रतिभाग करने वाले व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्यवाही का प्रावधान किया गया है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अंतर्गत बाल विवाह करने वाले व्यस्क पुरूष के लिए एवं बाल विवाह का अनुष्ठान करने वाले व्यक्तियों के लिए 2 साल के कठोर कारावास व 1 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह एक सामाजिक कुरीति है। जिसके शारीरिक एवं मानसिक रूप से गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं। अक्षय तृतीया पर बाल विवाह करने की रूढ़विादी परम्परा प्रचलित रही है। वर्ष 2023 में अक्षय तृतीया 22 अप्रैल को पड़ रही है। बाल विवाह रोकने के लिए जिला फरीदाबाद में विभिन्न प्रकार जन जागरूक कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समाज सेवी संस्थाओं की महिलाओं को जिला फरीदाबाद में बाल विवाह रोकने के लिए शपथ भी दिलवाई।
इस मौके पर जिला संरक्षण व बाल विवाह निषेध अधिकारी श्रीमती हेमा कौशिक ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए विवाह करवाने वाले पुजारी गांव के पंच सरपंच, बैंकेट हॉल व विवाह वाटिका के संचालकों को आगाह किया है। साथ ही विवाह समारोह आयोजित कराने वाले विवाह विशेष पैलेस व हॉल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे विवाह बुकिंग लेने से पहले दुल्हा व दुल्हन के आयु प्रमाण पत्र की जांच करे। उन्होंने कहा कि बाल विवाह आयोजन न होने दे। उन्होंने आमजन से अनुरोध करते हुए कहा है कि यदि उनके संज्ञान में ऐसा कोई विवाह आता है तो वह इस बारे में तत्काल हेल्पलाइन न0 112, महिला एवं बाल विकास हेल्पलाइन न0 181 या स्थानीय पुलिस स्टेशन पर सूचना दे।



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