मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट।
चंडीगढ़, 9 फरवरी: विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि राज्य के 22 जिला नागरिक अस्पतालों में डे-केयर कैंसर केंद्र (डीसीसीसी) कार्य करना शुरू कर चुके हैं। यह पहल विकेंद्रीकृत कैंसर देखभाल को सशक्त बनाएगी और आवश्यक उपचार सेवाएं मरीजों के घर के नजदीक उपलब्ध कराएगी। इससे पहले राज्य के पांच जिलों-अंबाला, पंचकूला, कुरूक्षेत्र, यमुनानगर और फरीदाबाद में ऐसे केंद्र संचालित थे।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि इन केंद्रों की परिकल्पना विकेंद्रीकृत कैंसर देखभाल सुविधाओं के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य मरीजों के लिए उपचार को अधिक सुलभ, किफायती और निरंतर बनाना है। जिला स्तर पर सेवाएं उपलब्ध होने से नियमित और फॉलो-अप उपचार के लिए तृतीयक अस्पतालों में बार-बार रेफरल की आवश्यकता कम होगी।
नव-प्रारंभित डे-केयर कैंसर केंद्रों के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. मिश्रा ने बताया कि ये केंद्र एनसीआई झज्जर, पीजीआईएमएस रोहतक, सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद तथा एसीसीसी अंबाला कैंट को हब बनाकर हब एवं स्पोक मॉडल के तहत फॉलो-अप कीमोथेरेपी सेवाएं प्रदान करेंगे।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि कैंसर देश में तेजी से मृत्यु और रोग भार का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है, जो सभी आयु वर्गों, लिंगों और भौगोलिक क्षेत्रों के लोगों को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि कैंसर न केवल आर्थिक रूप से सक्रिय आबादी को प्रभावित करता है, बल्कि बढ़ती बुजुर्ग आबादी पर भी इसका प्रभाव है, जिससे शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और दीर्घकालिक सहयोग महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताएं बन जाती हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय गैर-संचारी रोग निवारण एवं नियंत्रण कार्यक्रम (एनपी-एनसीडी) के तहत स्वास्थ्य विभाग कैंसर के जोखिम कारकों और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर जागरूकता अभियानों को तेज कर रहा है ताकि रोग भार को कम किया जा सके। विश्व कैंसर दिवस और राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस जैसे अवसरों का उपयोग नागरिकों को स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि तथा तंबाकू और शराब के सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए किया जाता है।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि हरियाणा में सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, उप-मंडलीय अस्पतालों और जिला नागरिक अस्पतालों में सामान्य कैंसरों की स्क्रीनिंग की जा रही है। संदिग्ध मामलों की पुष्टि एफएनएसी, पैप स्मीयर, फ्लूइड साइटोलॉजी और बायोप्सी जैसी जांच सुविधाओं के माध्यम से की जाती है, जो कई जिला स्तरीय अस्पतालों में उपलब्ध हैं।
उन्होंने आगे बताया कि नागरिक अस्पताल, अंबाला कैंट में स्थित अटल कैंसर केयर सेंटर (एसीसीसी) एक विशिष्ट और अत्याधुनिक सुविधा है, जो द्वितीय, स्तर पर समग्र कैंसर देखभाल प्रदान करता है। इस केंद्र में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी सेवाएं उपलब्ध हैं तथा यह लिनियर एक्सेलेरेटर, सीटी सिम्युलेटर और ब्रैकीथेरेपी यूनिट जैसी उन्नत तकनीकों से सुसज्जित है। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच एसीसीसी में 20,016 से अधिक मरीजों ने ओपीडी सेवाएं लीं। इसी अवधि में 2,743 मरीजों को 3,829 कीमोथेरेपी सत्रों के माध्यम से उपचार दिया गयाए जबकि 396 मैमोग्राफी जांच, 237 ब्रैकीथेरेपी प्रक्रियाएं और 721 सर्जरी सफलतापूर्वक की गईं।
मरीजों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए डॉ. मिश्रा ने बताया कि कैंसर मरीजों को एक सहायक के साथ नि:शुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जा रही है। इस पहल के तहत जारी किए गए फ्री ट्रैवल फैसिलिटी कार्डों की संख्या वर्ष 2022-23 में 7,617 से बढक़र 2023-24 में 9,408 और 2024-25 में 10,102 हो गई है, जो बढ़ती पहुंच और उपयोगिता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार स्टेज-3 और स्टेज-4 कैंसर मरीजों को जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय तीन लाख रुपये से कम है, प्रति माह 3,000 रूपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। अब तक सेवा विभाग के माध्यम से 5,807 कैंसर मरीजों को इस पेंशन योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया जा चुका है।
नव-प्रारंभित डे केयर कैंसर केंद्रों के बारे में बताते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि ये केंद्र फॉलो-अप कीमोथेरेपी, पैलिएटिव केयर, लक्षण प्रबंधन, सहायक सेवाएं तथा अनुमोदित क्लिनिकल प्रोटोकॉल के अनुरूप संरचित पोस्ट-ट्रीटमेंट फॉलो-अप प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा बजट भाषण में घोषित यह पहल हरियाणा में सुलभ और मरीज-केंद्रित कैंसर देखभाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर डॉ. सुमिता मिश्रा ने कैंसर की रोकथाम, शीघ्र पहचान, समग्र उपचार और दीर्घकालिक सहयोग के प्रति स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्वता दोहराते हुए कहा कि जिला स्तर की सेवाओं को सशक्त बनाना कैंसर से प्रभावित लोगों के जीवन की गुणवत्ता और उपचार परिणामों में सुधार लाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।





