अनाधिकृत व्यावसायिक भवनों की जांच के निर्देश, साप्ताहिक रिपोर्ट अनिवार्य: धीरेंद्र खडग़टा
Metro Plus से Naveen Gupta की स्पेशल रिपोर्ट।
Faridabad, 17 फरवरी: नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने तीन अधिकारियों को ये आदेश तो जारी कर दिए कि वे प्रत्येक सप्ताह कम से कम पांच-पांच ऐसे व्यावसायिक भवनों की पहचान कर उन्हें उनकी रिपोर्ट सौंपे जो अनाधिकृत व्यावसायिक भवन हों जिससे कि निगम को राजस्व का नुकसान हो रहा है, लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो पाएगा, शायद कदापि नहीं।
कारण, पहला तो ये कि निगमायुक्त को सबसे ज्यादा गुमराह तो इंफोर्समेंट विंग की टीम करती है जिनकी छत्र-छाया में निगम क्षेत्र खासकर बडख़ल विधानसभा के टाऊन नं.-1,2,3 और 5 में रिहायशी नक्शा पास कराकर वहां बहुमंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंगों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। किसी शिकायत या खबर पर संज्ञान लेते हुए यदि निगमायुक्त संबंधित अधिकारी को उस पर कार्यवाही करने के लिए मैसेज दे भी देते हैं तो अधिकारी उस पर कार्यवाही करने की बजाए निगमायुक्त के आदेशों को गोल कर उन्हें गुमराह कर देते हैं, क्योंकि निगमायुक्त दोबारा से उसका स्टेट्स नहीं मांगते या मांगना भूल जाते हैं।
दूसरा, इंफोर्समेंट विंग के अधिकारी निगमायुक्त को यह कहकर गुमराह कर देते हैं कि बिल्डिंग का तो जी नक्शा पास है जबकि वास्तव में नक्शा पहली बात तो पास ही नहीं होता और होता भी है तो वो रिहायशी होता है, जबकि उस बिल्डिंग का निर्माण कॉमर्शियल होता है और उसका चेंज ऑफ लेंड यूज यानि सीएलयू भी नहीं हुआ होता जिस कारण निगम को एक-एक प्लॉट पर लाखों की राजस्व फीस का नुकसान होता है।
NH-5 के रेलवे रोड़, बीके-केसी सिनेमा रोड़, नीलम बाटा रोड़, एफसीसीआई गोदाम रोड़ NIT-3, सैक्टर-9-10 डिवाडिंग रोड़ और नहर पार के मुख्य रोड़ों सहित व्हाईट हाऊस से अमोलिक रोड़ पर तो इसका जीता-जागता प्रत्यक्ष प्रमाण है जहां कि आज भी ना जाने कितने निर्माण बिना सीएलयू और कॉमर्शियल नक्शा पास कराए निर्माणाधीन हैं और काफी तो बन भी चुके हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इनकी सीएलयू और कॉमर्शियल नक्शा पास कराने की जो सरकारी फीस निगम के खजाने में जानी थी वो वहां जाने की बजाए संबंधित इंफोर्समेंट विंग की टीम के अधिकारियों/कर्मचारियों की जेबों में जा रही है और नुकसान निगम का होता है। कुछेक की फोटो हम भी इस खबर के साथ संलग्न कर रहे हैं जोकि शायद बिना सीएलयू और कॉमर्शियल नक्शा पास कराए बनी हुई हैं।
बता दें कि नगर निगम आयुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने आज मंगलवार को ही निर्देश जारी किए हैं कि निगम क्षेत्र में बड़ी संख्या में अनाधिकृत व्यावसायिक भवन निर्मित पाए गए हैं, जिससे नगर निगम को राजस्व की हानि हो रही है। इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए निगम आयुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने मुख्य नगर योजनाकार (चीफ टाउन प्लानर), वरिष्ठ नगर योजनाकार (सीनियर टाउन प्लानर) एवं वरिष्ठ वास्तुकार (सीनियर आर्किटेक्ट) को निर्देश दिए हैं कि वे सभी अपने अधीनस्थ स्टॉफ की सहायता से प्रत्येक सप्ताह कम से कम पांच-पांच ऐसे व्यावसायिक भवनों की पहचान करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले की केस वाइज रिपोर्ट तैयार कर संबंधित सुझावात्मक कार्रवाई सहित हर शुक्रवार को कमिश्नर कार्यालय में प्रस्तुत करें।
निगम आयुक्त धीरेंद्र खडग़टा ने कहा कि निगम के राजस्व की सुरक्षा एवं नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए यह अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब देखना यह है कि निगमायुक्त के आदेशों को कितना असर इन अधिकारियों पर पड़ता है और बिना सीएलयू और कॉमर्शियल नक्शा पास कराए कितनी बिल्डिंगों पर निगमायुक्त की गाज गिरती है।


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FP-43,NIT







