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ईमानदार निगमायुक्त: आखिर क्या सोच कर तोड़े जाते हैं अवैध निर्माण? Part-2

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की खास रिपोर्ट

निगमायुक्त का मुंह चिढ़ा रहीं हैं तोडफ़ोड़ के बावजूद भी बनकर तैयार हो रहीं बहुमंजिला ईमारतें
फरीदाबाद, 11 जुलाई:
नगर निगम फरीदाबाद (MCF) द्वारा निगम क्षेत्र में की जाने वाली तोडफ़ोड़ का आखिर क्या मकसद है? क्या निगम अधिकारी शहर को अवैध निर्माण और अवैध कब्जों से मुक्त कराना चाहते हैं या फिर तोडफ़ोड़ की आड़ में अपनी तिजोरियों को भरना चाहते हैं? ऐसे कई सवाल लोगों के जहन/दिलो-दिमाग में कौंध रहें हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब बिल्डिंग बननी ही है तो फिर क्यों निगम अधिकारियों द्वारा अवैध बताकर उसको तोड़कर लोगों का मोटा नुकसान किया जाता है। बनने से पहले ही क्यों नहीं उनको नोटिस देकर ईमारत को बनने से रोका जाता है। लेकिन ऐसा नहीं किया जाता क्योंकि ऐसा करके निगम अधिकारी अपनी उन इच्छाओं की पूर्ति अपने मन-मुताबिक नहीं कर सकते जोकि वो तोडफ़ोड़ करने के बाद करते हैं। पुलिस बल के साये में तोडफ़ोड़ कर निगम अधिकारी अवैध निर्माणकर्ता पर प्रेशर बनाते हैं और फिर अपने अनुसार सौदेबाजी करते हैं। पुलिस का तो यहां जमकर दुरूप्रयोग किया जाता है।
ऐसे कई उदाहरण हैं जो निगम अधिकारियों की उक्त मंशा को दर्शाते हैं। अगर हम बात करें गत् एक मार्च, 2019 को निगमायुक्त के आदेशों पर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते द्वारा एन.एच.-1 में की गई तोडफ़ोड़ की तो उस दिन नगर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते ने एक्सईएन ओमवीर सिंह, एसडीओ विनोद मलिक, जेई सुमेर सिंह के नेतृत्व में 6 स्थानों पर चार जे.सी.बी. की सहायता से भारी पुलिस बल के साये में तोडफ़ोड़ की कार्यवाही को अंजाम दिया था।

  1. इस दिन सबसे पहले एन.एच.-1 के ब्लॉक में संतों के गुरूद्वारे व बिजली निगम के साथ लगते कोने के प्लॉट नं.एसएसआई-9 में बन रही जिस कॉमर्शियल ईमारत/दुकानों को निगम के पीले पंजे से धाराशायी कर जमींदोज किया गया था वहां आज मात्र तीन-चार महीने में ही लगभग तैयार सी खड़ी निर्माणाधीन बहुमंजिला ईमारत उस ईमानदार निगमायुक्त के आदेशों को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है जिनके कहने पर यहां तोडफ़ोड़ की गई थी। आज भी उक्त ईमारत में रात-दिन निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि अवैध निर्माणकर्ताओं द्वारा लोगों भ्रम में रखने के लिए यह प्रचार किया गया है कि उन्होंने नगर निगम से अपनी उक्त कॉमशियल बहुमंजिला ईमारत का नक्शा पास करा लिया है ताकि उनकी कोई शिकायत ना कर सके लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है। वैसे इस मामले की पुन: शिकायत संतों के गुरूद्वारे वाली संस्था डेरा संत भगत सिंह जी महाराज के प्रधान मनोहरलाल अरोड़ा और ट्रस्टी मेंबर आई.डी.अरोड़ा द्वारा हाल ही में 5 जुलाई को सीएम विंडो पर की गई है कि लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने लालच के वशीभूत इस शिकायत को भी शायद रद्दी की टोकरी में डाला हुआ है।
  2. इसके बाद निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता वहीं पास में ही बन रही दुकानों को तोडऩे पहुंचा तो वहां निर्माणकर्ता ने चूंकि उनको अंडरटेकिंग दे दी की वो स्वयं ही अपनी दुकानों को तोड़ लेंगे तो इस पर निगम टीम वहां से आगे चल दी।
  3. -4. इसके बाद तोडफ़ोड़ दस्ता पहुंचा बी.के.-हार्डवेयर रोड़ पर अवैध रूप से बन रहे मित्तल फोम हाऊस (शॉप नंबर-17-18, न्यू तिकोना मार्किट) तथा दौलतराम खान धर्मशाला के सामने गर्ग फोम हाऊस (1जी/51ए) पर जहां उन्होंने जैसे ही तोडफ़ोड़ करने की कार्यवाही शुरू की तो अवैध निर्माणकर्ताओं के सरदार ठेकेदार ने भी उस समय नगर निगम को लिखित में अंडरटेकिंग दी थी कि उनके निर्माण को जेसीबी से ना तोड़ा जाए, वो अपना निर्माण स्वयं हटा लेंगे, लेकिन वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ। अवैध निर्माणकर्ताओं के हौंसलें इतने बुलंद थे कि उन्होंने ईमानदार निगमायुक्त के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए अपने अवैध निर्माण पर से एक भी ईंट हटाने की बजाए वहां बहुमंजिला कॉमर्शियल ईमारत खड़ी कर ली। इस मामले में एक्सईएन ओमवीर सिंह ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि मौका-मुआयना कर जरूरी कार्यवाही की जाएगी।
    हालांकि इस मामले में नगर निगम ने तो अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की लेकिन मैट्रो प्लस में खबर आने के बाद शासन-प्रशासन की विभिन्न एजेंसियों द्वारा पुलिस के माध्यम से इस मामले की जांच करवाई जा रही कि सारा माजरा क्या है। देखना है कि पुलिस इस मामले में इन एजेंसियों को अपनी क्या रिपोर्ट सौंपती हैं।
  4. इसके बाद निगम टीम पहुंची गोल्फ क्लब पर जहां मैरिज गार्डन/बैंक्विट हॉल बन रहा था। यहां तोडफ़ोड़ दस्ते ने जे.सी.बी. से जमकर तोडफ़ोड़ की और पूरे हॉल की टीन शैड व दीवारें आदि तोड़ दी।
  5. आखिर में नंबर आया मैट्रो रोड़ पर ही फ्रन्टियर कालोनी में बन रही ईमारत का जिसको निगम दस्ते ने धाराशायी कर दिया।
    उपरोक्त ये तो चंद उदाहरण हैं जोकि नगर निगम अधिकारियों की भ्रष्ट्र कार्यप्रणाली को दर्शाते हैं। क्या ऐसे भ्रष्ट्र अधिकारी इतने निरंकुश हो चुके हैं कि निगमायुक्त भी इन पर कोई नकेल नहीं कस सकती जोकि उनके आदेशों को अमलीजामा पहनाने के नाम पर अपनी-अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं। दिनोंदिन अवैध रूप से लगातार खड़ी होती जा रहीं बहुमंजिला ईमारतें उस ईमानदार निगमायुक्त की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही हैं जिस निगमायुक्त ने शहर के सौंदर्यकरण के लिए अपने निगम अधिकारियों के लाव-लश्कर के साथ Escorts समूह के चेयरमैन निखिल नंदा के दरवाजे तक पहुंचने से भी गुरेज नहीं किया।
    अब देखना यह है कि ईमानदार निगमायुक्त इन मामलों में क्या रूख अपनाती हैं।



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