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क्या सरकारी स्कूलों के कंडम व जर्जर हो चुके कमरे नए सिरे से बनेंगे?

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
शिक्षा विभाग द्वारा छिपाए गए तथ्यों से हाईकोर्ट को अवगत कराया जाएगा: अशोक अग्रवाल
फरीदाबाद, 19 मई:
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा हरियाणा के शिक्षा विभाग को लगाई गई फटकार रंग लाई है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद शिक्षा विभाग ने कंडम व जर्जर हो चुके फरीदाबाद के उन 8 सरकारी स्कूलों को दोबारा बनाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेट्री महावीर सिंह ने हाईकोर्ट में एफिडेविट भी दाखिल कर दिया है।
इस एफिडेविट के माध्यम से हाईकोर्ट को बताया गया है कि फरीदाबाद के 8 सरकारी स्कूलों की कंडम हो चुकी बिल्डिंग व खस्ताहाल कमरों को नया बनाने के आदेश दे दिए गए है और इसके लिए बजट भी तय कर दिया गया है। यह एफिडेविट सोशल जूरिस्ट एनजीओ की ओर से उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील अशोक अग्रवाल द्वारा फरीदाबाद के 8 सरकारी स्कूलों की जर्जर व कंडम हो चुकी बिल्डिंग को लेकर दायर की गई याचिका की सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान दाखिल किया गया
एफिडेविट में बताया गया है कि याचिका में दर्शाए गए फरीदाबाद के 8 सरकारी स्कूल अनंगपुर, तिगांव, बाल इंदिरा नगर, प्रेस कॉलोनी, वडख़ल गांव प्रेस कॉलोनी, दयालपुर गोच्छी में जर्जर हो चुकी स्कूल बिल्डिंग व खस्ताहाल कमरों को नया बनाने के लिए 1120 लाख का बजट स्वीकृत करके टेंडर जारी कर दिए गए हैं। शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश शर्मा ने बताया कि सुनवाई के दौरान अशोक अग्रवाल ने डबल बेंच के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि उच्च न्यायालय एक उच्च स्तरीय कमेटी बनवाकर हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों की जर्जर व कंडम हो चुकी बिल्डिंग कमरों व संसाधनों की कमी के बारे में जांच कराएं, क्योंकि हरियाणा के अधिकांश सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग वह कमरे जर्जर हालत में हैं और उन्हीं में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है जिससे कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस मांग पर उच्च न्यायालय में आगामी 6 फरवरी को चर्चा होगी तब तक ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन और अभिभावक एकता मंच की टीम मिलकर प्रदेश के कई जिलों में जाकर वहां के सरकारी स्कूलों की दशा का पता लगाकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
एफिडेविट में बताया गया है कि इंदिरा कॉलोनी स्थित सरकारी स्कूल के कमरों का साइज बहुत छोटा है स्कूल में स्थान बहुत कम है और नए कमरों का निर्माण हो नहीं सकता। इसके लिए दूसरी जगह तलाश की जा रही है। इसी प्रकार प्रेस कॉलोनी सरकारी स्कूल ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा बनाए गए सर्वेंट क्वार्टरों में किराए पर चल रहा है इसके लिए भी जिला शिक्षा अधिकारी से कहा गया है कि इस स्कूल को शिफ्ट करके स्कूल के लायक किसी अन्य किराए की बिल्डिंग में चलाने की व्यवस्था की जाए।
गौरतलब है कि आइपा व मंच की टीम ने अशोक अग्रवाल के नेतृत्व में अगस्त व सितंबर महीने में फरीदाबाद के उपरोक्त 8 स्कूलों में जाकर के वहां की बिल्डिंग व कमरों व जरूरी संसाधनों के बारे में पता लगाया और पूरी रिपोर्ट उच्च न्यायालय के सामने एक जनहित याचिका के माध्यम से रखी जिसकी पहली सुनवाई 1 नवंबर को हुई। इस सुनवाई के बाद में प्रिंसिपल सेक्रेट्री शिक्षा को नोटिस जारी करके आगामी सुनवाई 18 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर याचिका में दर्शाई गई बातों पर अपना एफिडेविट दाखिल करने के लिए कहा। इस पर सोमवार को सुनवाई के दौरान एफिडेविट दाखिल किया गया।
अशोक अग्रवाल ने एफिडेविट में लिखी गई बातों का अध्ययन करने के बाद यह जाना है कि प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने कई तथ्यों को छुपाया है जिसे आगामी सुनवाई के दौरान डबल बेंच की जानकारी में लाया जाएगा।
कैलाश शर्मा ने सभी सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपल व उस स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी से कहा है कि वे अपने स्कूलों की जर्जर बिल्डिंग व खस्ताहाल कमरों और स्कूल में जरूरी होने वाली सुविधाओं की कमी के बारे में अपने जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखें और उसकी एक प्रति अभिभावक एकता मंच को भेजें जिससे उनके स्कूलों की स्थिति के बारे में आगामी 6 फरवरी को होने वाली सुनवाई में चर्चा की जा सके।



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