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निजी स्कूलों में चल रही Online Classes को अभिभावकों ने सराहा: नरेंद्र परमार

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
फरीदाबाद, 21 मई:
कोरोना महामारी के चलते जहां सभी उद्योग, मार्केट व्यवसाय बन्द है वहीं निजी स्कूलों के अध्यापक ऑनलाईन क्लासेज के द्वारा बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस (एचपीएससी) के प्रवक्ता नरेंद्र परमार ने बताया कि निजी स्कूलों में चल रही ऑनलाईन क्लासेज को अभिभावकों एवं छात्रों के द्वारा नए तर्जुबे के रूप में लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्कूल संचालकों के द्वारा छोटे बच्चों के लिए पीडीएफ फाइल के माध्यम से अभिभावकों को गृह कार्य भेजा जाता है एवं जरूरी होने पर ही मोबाईल या लैपटॉप से डायरेक्ट क्लासेज दी जाती हैं ताकि बच्चे ज्यादा समय मोबाईल या लैपटॉप का इस्तेमाल न करें।
वहीं दूसरी और बड़े बच्चों को ऑनलाईन क्लासेज दी जा रही हैं। लेकिन बड़े खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ शरारती तत्वों के द्वारा अभिभावकों को भरमाया जा रहा है कि निजी स्कूलों के द्वारा ऑनलाईन क्लासेज मात्र ट्यूशन फीस के लिए चलाई जा रही है जबकि वास्तविकता में अभिभावक इसको सराह रहे हैं।
एचपीएससी के जिला अध्यक्ष सुरेश चंद्र ने कहा कि अभिभावक किसी भी तरह के दुष्प्रचार में न आए। निजी स्कूल अध्यापक पहले से भी ज्यादा समय ऑनलाईन क्लासेज को सफल बनाने के लिए दे रहे हैं ताकि छात्रों को शिक्षा सम्बंधित कोई परेशानी नहीं हो और पठन पाठन सुचारू रूप से चलता रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने भी स्कूलों में चल रही ऑनलाईन क्लासेज की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। इसके लिए कॉन्फ्रेंस उनका धन्यवाद भी करती है और भरोसा भी देती है कि निजी स्कूल प्रदेश में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में सरकार का हमेशा साथ देंगे। वहीं उन्होंने अभिभावकों से भी शरारती तत्वों के दुष्प्रचार में न आने की अपील करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही अभिभावक अपने बच्चों की मासिक फीस जमा करवाए। ताकि निजी स्कूलों में कार्यरत अध्यापकों एवं कर्मचारियों को वेतन दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में से भी जो शिक्षा नियमावली के नियमों के विरुद्ध है और न्यायसंगत नहीं है, हमारी कॉन्फ्रेंस शिक्षा विभाग को अपनी आपत्ति पत्र के माध्यम से भेज चुकी है और उम्मीद करती हैं कि विभाग उन में सुधार कर नए दिशा-निर्देश जारी करेगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो निजी स्कूल शिक्षा नियमावली के नियमों के तहत न्यायलय की शरण में जाने के लिए भी स्वतंत्र हैं।

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