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हरियाणा की अदालतों ने 17 महीनों में 81 हजार से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया: डॉ. सुमिता मिश्रा

नए आपराधिक कानूनों के तहत 72 प्रतिशत सजा दर: डॉ. सुमिता मिश्रा
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 24 दिसंबर:
हरियाणा के गृह विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हरियाणा ने नए आपराधिक कानूनों के तहत 72 प्रतिशत की उल्लेखनीय सजा दर हासिल की है, जो जुलाई 2024 से नवंबर 2025 की अवधि के दौरान पुराने कानूनी ढांचे के तहत दर्ज 24 प्रतिशत सजा दर से तीन गुना अधिक है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि इस 17 माह की अवधि में हरियाणा की आपराधिक न्याय प्रणाली ने 81,000 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया जिनमें से 77,504 मामलों का निपटारा पुराने कानूनों के तहत और शेष मामलों का निपटारा नए आपराधिक कानूनों के अंतर्गत किया गया।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि अभियोजन एजेंसी को व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं जिनमें आपराधिक मामलों की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है। इसमें विशेष रूप से बलात्कार, पोक्सो अधिनियम 2012 के तहत दर्ज अपराधों और महिलाओं के विरूद्व अपराधों से जुड़े मामलों पर फोकस किया गया है।

उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 346 के अनुरूप सभी जिला अटॉर्नी और लोक अभियोजकों को बलात्कार और पोक्सो मामलों में स्थगन (अजर्नमेंट) न मांगने के निर्देश दिए गए हैं। गृह विभाग की एसीएस ने यह भी निर्देश दिए हैं कि पीडि़़तों और संवेदनशील गवाहों की जांच को प्राथमिकता दी जाए और जांच से जुड़े अन्य औपचारिक गवाहों से पहले उनका बयान दर्ज किया जाए।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि ‘नए कानूनों ने अपराधों और प्रक्रियाओं की परिभाषा में अधिक स्पष्टता और सटीकता लाई है, जिससे जांच अधिकारियों और अभियोजकों को मजबूत मामले तैयार करने में मदद मिली है।’ उन्होंने बेहतर कानूनी स्पष्टता और जांच एजेंसियों तथा अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय को सजा दर में सुधार का प्रमुख कारण बताया। डॉ. मिश्रा ने अभियोजन विभाग के कार्य की भी सराहना की।

आंकड़ों में बरी किए जाने वाले मामलों को योग्यता (मेरिट) के आधार पर तथा शत्रुतापूर्ण गवाहों के कारण हुए बरीकरण के रूप में अलग-अलग दर्शाया गया है, जिससे जांच से जुड़ी चुनौतियों को लेकर पारदर्शिता बनी है। लंबित मामलों के कुशल प्रबंधन के लिए अदालतों ने आरोपियों की डिस्चार्ज, एफआईआर रद्द करना, अपराधों का समझौता और मामलों की वापसी जैसे कानूनी प्रावधानों का भी उपयोग किया है।

होम सेक्रेटरी डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सरकार जांच की गुणवत्ता, गवाह संरक्षण और अभियोजन मानकों में सुधार के लिए प्रतिबद्व है। उन्होंने कहा कि ‘नए कानूनों के तहत असाधारण प्रदर्शन हमें आगे का मार्ग दिखाता है, जिससे समग्र सुधार संभव है और साथ ही निष्पक्ष तथा साक्ष्य-आधारित न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।’

उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार इन सकारात्मक रूझानों को आगे बढ़ाने के लिए जांच की गुणवत्ता, गवाह संरक्षण तंत्र और अभियोजन मानकों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्व है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि जैसे-जैसे हम अपनी प्रणालियों को सुदृढ़ करते जाएंगे, हमें समग्र सजा दर में और सुधार की उम्मीद है, जबकि निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्वता बनी रहेगी।

उन्होंने आगे बताया कि अदालतें मामलों के त्वरित निपटारे के लिए आधुनिक केस प्रबंधन तकनीकों और नियमित निगरानी तंत्र का उपयोग कर रही हैं। प्रशिक्षण, तकनीक के उपयोग और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर निरंतर ध्यान के साथ, हरियाणा की आपराधिक न्याय प्रणाली आने वाले महीनों में अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने की दिशा में अच्छी तरह से अग्रसर दिखाई देती है।



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