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डॉ. सुमिता मिश्रा बन सकती है प्रदेश की मुख्य सचिव!

अनुराग रस्तोगी के अस्वस्थ होने के एक सप्ताह बाद भी मुख्य सचिव पद पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 16 जनवरी:
आगामी फरवरी-मार्च महीने में प्रदेश विधानसभा में राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया जाना है जिसमें मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के अस्वस्थ होने के चलते समस्या आ सकती है। वहीं मुख्य सचिव की कुर्सी के खाली होने के कारण प्रशासनिक कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश सरकार किसी भी समय प्रदेश की मौजूदा गृह, जेल, न्याय-प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं 1990 बैच की सबसे वरिष्ठम आईएएस अधिकारी डॉ. सुमिता मिश्रा जिनके पास वित्तायुक्त (एफसीआर) एवं राजस्व एवं आपदा विभाग विभाग के एसीएस का औपचारिक तौर पर अतिरिक्त कार्यभार आवंटित तो नहीं है लेकिन लिंक ऑफिसर हैं, को प्रदेश के मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठा सकती है।

बता दें कि हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की एक सप्ताह पूर्व शुक्रवार 9 जनवरी को हुई हार्ट सर्जरी के फलस्वरूप वह आगामी कई दिनों या संभवत: कई सप्ताह तक अपने पद का दैनिक कामकाज निभाने में असमर्थ रहेंगे। इसी के चलते प्रदेश सरकार को रस्तोगी के स्थान पर प्रदेश के मुख्य सचिव पद पर किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को तैनात करना ही पड़ेगा। हालांकि आज एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी प्रदेश के सर्वोच्च नौकरशाह की कुर्सी पर तैनाती सम्बन्धी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बीते दिनों इस सम्बन्ध में प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य आला अधिकारियों को लिखकर यह मामला उठाया था, परन्तु दुर्भाग्यवश अब तक वांछित कार्रवाई लंबित है। उन्होंने बताया कि हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा तबादला, रिटायरमेंट, छुट्टी, ट्रेनिंग, चुनावी ड्यूटी और दो दिनों से अधिक समय पर उपलब्ध न होने कारण से सभी वरिष्ठ और अहम प्रशासनिक पदों पर हुई रिक्ति के लिए लिंक ऑफिसर पदांकित करने सम्बन्धी समय-समय पर जारी हिदायतों द्वारा उपयुक्त व्यवस्था की गई है। परन्तु आज तक मुख्य सचिव के पद के लिए कोई इस प्रकार से कोई भी लिंक ऑफिसर पदांकित नहीं है। इसी के चलते अब यह सवाल भी उठने लगा है कि रस्तोगी की अनुपस्थिति में अहम शासकीय आदेशों की फाइलों पर स्वीकृति देने हेतू मुख्य सचिव के तौर पर कौन हस्ताक्षर कर रहा है? 9 जनवरी के बाद मुख्य सचिव कार्यालय से कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किये गये हैं, जिनमें आधिकारिक दस्तावेजों पर हरिजिन और गिरिजन जैसे शब्दों का उपयोग न करना और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग आरक्षण हेतू वार्षिक पारिवारिक आय की सीमा को पूर्ववत 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रूपये करना शामिल है।

हेमंत ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व 15 मार्च, 2024 को जब प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव संजीव कौशल अपनी रिटायरमेंट से साढ़े चार माह पूर्व छुट्टी (अर्जित अवकाश) पर चले गये थे तो प्रदेश सरकार द्वारा टीवीएसएन प्रसाद जो उस समय मुख्यत: प्रदेश के वित्तायुक्त (एफसीआर)और राजस्व एवं आपदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) थे एवं उनके पास तब गृह, जेल, न्याय-प्रशासन विभागों का भी अतिरिक्त कार्यभार था, उन्हें उनके तत्कालीन विभागों के साथ मुख्य सचिव का भी अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था। 31 जनवरी, 2024 को संजीव कौशल की आईएएस से रिटायरमेंट के बाद 1 अगस्त, 2024 से टीवीएसएन प्रसाद नियमित तौर पर प्रदेश के मुख्य सचिव बने।

यही नहीं, 31 अक्टूबर 2024 को जब टीवीएसएन प्रसाद आईएएस से रिटायर हुए जब विवेक जोशी को राज्य का अगला मुख्य सचिव बनाया गया, परन्तु जोशी के केंद्र सरकार पर डेपुटेशन पर होने कारण उनके हरियाणा सरकार में वापसी तक के लिए अनुराग रस्तोगी जो तब वित्त एवं गृह विभागों के एसीएस थे, को अंतरिम तौर पर मुख्य सचिव तैनात किया गया था। हालांकि इस पद पर तब वह केवल तीन दिन अर्थात 1 नवम्बर, 2024 से 3 नवम्बर, 2024 तक ही रहे। बहरहाल, गत वर्ष फरवरी 2025 में विवेक जोशी के देश का निर्वाचन आयुक्त नियुक्त होने के कारण 20 फरवरी, 2025 को अनुराग रस्तोगी को नियमित तौर पर राज्य का मुख्य सचिव बनाया गया। उनकी आईएएस से रिटायरमेंट 30 जून, 2025 को निर्धारित थी परन्तु केंद्र सरकार द्वारा उन्हें एक वर्ष अर्थात 30 जून 2026 तक एक्सटेंशन प्रदान की गई।

बहरहाल, क्या मार्च, 2024 की तर्ज पर आज की परिस्थिति में प्रदेश की मौजूदा गृह, जेल, न्याय-प्रशासन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा जिनके पास वित्तायुक्त (एफसीआर) एवं राजस्व एवं आपदा विभाग विभाग के एसीएस का औपचारिक तौर पर अतिरिक्त कार्यभार तो आवंटित नहीं है, परन्तु डॉ. सुमिता गृह सचिव होने के कारण गत 11 महीनों से राजस्व एवं आपदा विभाग विभाग की लिंक ऑफिसर है, अब क्या उन्हें इसके साथ-साथ प्रदेश के मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार भी दिया जा सकता है। वैसे ऐसा करने में कोई रोक नहीं है, परन्तु चूंकि मुख्य सचिव का पद और प्रदेश के एफसीआर अर्थात राजस्व सचिव का पद दोनों प्रदेश नौकरशाही के सबसे वरिष्ठतम क्रमश: पहला और दूसरा पद होते हैं, इसलिए सही यही होगा कि डॉ. सुमिता मिश्रा को पहले मुख्य तौर पर एफसीआर एवं राजस्व एवं आपदा विभाग का एसीएस तैनात किया जाए और उसके बाद प्रदेश के मुख्य सचिव का अतिरिक्त कार्यभार दिया जाए। हालांकि अगर प्रदेश सरकार चाहे तो उन्हें साथ-साथ गृह, जेल, न्याय-प्रशासन विभागों का भी एक और अतिरिक्त कार्यभार दे सकती है जिसमें कि कोई प्रशासनिक रोक नहीं है क्योंकि इससे पहले मार्च, 2024 से जुलाई, 2024 तक टीवीएसएन प्रसाद के पास भी उपरोक्त सभी कार्यभार एक साथ रहे थे।

जहां तक अनुराग रस्तोगी के पास वित्त एवं योजना विभाग के एसीएस का अतिरिक्त कार्यभार होने का विषय है, इस पर हेमंत ने बताया कि वैसे तो हरियाणा सरकार द्वारा लागू लिंक ऑफिसर्स की व्यवस्था अनुसार वित्त एवं योजना विभाग के एसीएस का लिंक ऑफिसर आबकारी एवं कराधान विभाग का प्रशासनिक सचिव होता है और चूंकि इस समय 2004 बैच की आईएएस आशिमा बरार आबकारी एवं कराधान विभाग की आयुक्त एवं सचिव है तो इस कारण वह वित्त एवं योजना विभाग के प्रशासनिक सचिव की लिंक ऑफिसर बन सकती हैं। परन्तु चूंकि वह साथ वित्त विभाग में आयुक्त एवं सचिव-2 भी तैनात हैं और क्योंकि वित्त विभाग में आयुक्त एवं सचिव-1 के पद पर उनसे वरिष्ठ 2002 बैच के आईएएस मोहम्मद शाईन तैनात हैं, इसलिए वित्त एवं योजना विभाग में नियमित तौर पर किसी वरिष्ठ आईएएस की प्रशासनिक सचिव के तौर पर तैनाती की जानी चाहिए, विशेष तौर पर जब आगामी फरवरी-मार्च महीने में प्रदेश विधानसभा में राज्य का वार्षिक बजट भी प्रस्तुत किया जाना है।



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