Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 19 फरवरी: हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वितायुक्त डॉ.सुमिता मिश्रा ने राज्य के मण्डलायुक्त और उपायुक्तों को निर्देश दिये है कि वे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और न्यायालय के आदेशों का तय कानूनी नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन अवश्य सुनिश्चित करें। डॉ. मिश्रा ने कहा कि मुख्य राजस्व अधिकारी, सब-रजिस्ट्रार और संयुक्त सब-रजिस्ट्रार को नेशनल कम्पनी ट्रिब्यूनल और कोर्ट के आदेशों के रजिस्ट्रेशन के संबंध में 13 नवंबर, 2013 को पहले के जारी निर्देशों और 22 नवंबर 2017 की अधिसूचना का पालन करना हैं।
उन्होंने बताया कि नेशनल कम्पनी ट्रिब्यूनल के आदेशों से जुड़े मामलों में इंडियन स्टैम्प एक्ट, 1899 के शेड्यूल 1-ए के आर्टिकल 23-ए के तहत 1.5 प्रतिशत की दर से स्टैम्प ड्यूटी लगती है, जिसकी ज्यादा से ज्यादा लिमिट 7.5 करोड़ रुपये है। इसी तरह नॉन-बोनाफाइड कोर्ट के आदेश भी इसी नियम के तहत आते हैं। इन कानूनी नियमों का पालन करके राज्य के खजाने पर स्टैम्प ड्यूटी राजस्व बढ़ाया जाना है।
डॉ. मिश्रा ने इस बात पर बल दिया कि इंडियन स्टैम्प एक्ट के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और ऐसे मामलों में बिना किसी छूट के सही स्टैम्प ड्यूटी का आंकलन और रजिस्ट्रेशन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अचल संपत्ति के ट्रांसफर से जुड़े कई मामलों में न्यायालय द्वारा जारी स्टे ऑर्डर सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस में पहुंचने पर जमाबंदी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह चूक न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन है। इसलिए सर्कल राजस्व अधिकारी को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये है कि किसी भी न्यायालय से मिला कोई भी स्टे ऑर्डर तुरंत रेवेन्यू रिकॉर्ड में दिखाई दे।
वित्तायुक्त राजस्व ने सभी उपमण्डलायुक्तों और उपायुक्तों से कहा है कि वे अपने अधीन सभी संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देश दें कि वे इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इन मामलों में कोई भी चूक होने पर दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाई अमल में लाई जाएगी।





