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मंदिरों के फूलों से बना प्राकृतिक गुलाल, फरीदाबाद बना वेस्ट टू वेल्थ की मिसाल

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।

Faridabad News, 27 फरवरी: आस्था, पर्यावरण और नवाचार का सुंदर संगम फरीदाबाद में देखने को मिला है। नगर निगम फरीदाबाद और विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से वेस्ट टू वेल्थ मॉडल को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारा गया है।

विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन के प्रेजिडेंट शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति एस.एस. बांगा ने बताया कि पावन महाशिवरात्रि के अवसर पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्वेश्य मंदिरों में अर्पित फूलों को कचरे में जाने से रोकते हुए उन्हें उपयोगी एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में परिवर्तित करना है। नगर निगम आयुक्त धीरेन्द्र खडग़टा के साथ बैठक कर इस पहल को कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्रमुख मंदिरों से रोजाना संग्रह:-

विक्टोरा लाइफ फाउंडेशन की वाईस प्रेजिडेंट दमन बांगा ने जानकारी दी कि अभियान के प्रथम चरण में शहर के प्रमुख मंदिरों शिव मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, हनुमान मंदिर, महारानी वैष्णो देवी मंदिर, काली मंदिर, गीता मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर सहित अन्य मंदिरों से प्रतिदिन फूल एकत्रित किए जा रहे हैं। इन फूलों को वैज्ञानिक एवं स्वच्छ प्रक्रिया से सुखाकर उनके प्राकृतिक रंगद्रव्यों से त्वचा-अनुकूल, रसायन-मुक्त और पर्यावरण-अनुकूल गुलाल तैयार किया जा रहा है। अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोडऩे के लिए एसपीआर सोसाइटी सैक्टर-82 और पूरी प्राणायाम सैक्टर-82 सहित विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों को भी जोड़ा जा रहा है। मंदिरों एवं अन्य स्थानों से समन्वय के लिए स्वयंसेवी समूह का गठन किया गया है, जिसमें बबिता सिंह, पूर्णिमा रस्तोगी, रूबी मल्ही और कमल कांत शर्मा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

निगम आयुक्त ने प्राकृतिक गुलाल से खेली होली:-

तैयार प्राकृतिक गुलाल एस.एस. बांगा द्वारा नगर निगम आयुक्त धीरेन्द्र खडग़टा को भेंट किया गया। आयुक्त ने इसे स्वच्छता और रीसाइक्लिंग अभियान को नई दिशा देने वाला कदम बताया और भविष्य में इसे अधिक मंदिरों और संस्थानों तक विस्तारित करने की बात कही। उन्होंने क्लीन और ग्रीन फरीदाबाद के संकल्प को सशक्त बनाने के लिए अन्य संगठनों से भी जुडऩे का आह्वान किया।

पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव:-

मानव रचना विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ० विनायक पाठक के अनुसार यदि 100 किलोग्राम फूलों को लैंडफिल में जाने से रोका जाए तो लगभग 6.2 किलोग्राम मीथेन गैस के उत्सर्जन को रोका जा सकता है। जो लगभग 174 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य उत्सर्जन के बराबर है। यह प्रभाव लगभग एक पेट्रोल कार को 700-800 किलोमीटर चलाने से होने वाले उत्सर्जन के समान है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम:-

इस संयुक्त पहल के अंतर्गत भविष्य में अगरबत्ती, धूपबत्ती और अन्य जैविक उत्पाद तैयार करने की भी योजना है, जिससे विशेषकर महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें। यह पहल प्रमाण है कि जब प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर कार्य करती हैं, तो आस्था के फूल भी स्वच्छता, हरित विकास और आत्मनिर्भर भारत के सशक्त प्रतीक बन सकते हैं।

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