Metro Plus News
फरीदाबादराजनीतिराष्ट्रीयहरियाणा

राज्यसभा चुनाव जीतने पर सतीश नांदल को करना पड़ सकता है भाजपा से किनारा, वैसे बन सकते हैं मंत्री भी!

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट
Chandigarh, 6 मार्च:
हरियाणा से राज्यसभा की दो सीटों के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा कराये जा रहे चुनाव जिसके लिए कि नामांकन भरने की अंतिम तिथि गुरूवार 5 मार्च थी, में भाजपा की ओर से करनाल संसदीय सीट से पार्टी के पूर्व सांसद संजय भाटिया ने जबकि कांग्रेस की तरफ से अनुसूचित जाति वर्ग से सम्बंधित और हरियाणा सिविल सचिवालय से ग्रुप बी अधिकारी के पद से सेवानिवृत कर्मवीर सिंह बौद्व ने पार्टी प्रत्याशी के तौर पर अपना-अपना नामांकन भरा है। वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल ने नामांकन दाखिल किया है। नामांकन की जांच आज शुक्रवार 6 मार्च को हुई जिसमें सतीश नांदल का नामांकन सही पाया गया। अब उम्मीदवारी वापसी का अंतिम दिन 9 मार्च है और मतदान 16 मार्च को निर्धारित है।

इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और चुनावी संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि अगर 6 मार्च को नामांकन की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) पंकज अग्रवाल द्वारा सभी नामांकन सही पाए जाने के बाद अब सोमवार 9 मार्च तक निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल यदि अपनी उम्मीदवारी वापिस नहीं लेते हैं तो 16 मार्च को मतदान कराना ही होगा जिसमें कुछ भी हो सकता है और क्रॉस वोटिंग से भी इंकार नहीं जा सकता है।

बता दें कि हरियाणा विधानसभा की 90 सदस्य संख्या के आधार पर राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार की जीत के लिए 31 विधायक होने आवश्यक है अर्थात 31 विधायक अगर किसी प्रत्याशी को मतदान में अपनी पहली प्राथमिकता का वोट देते हैं तभी तो जीत सकता है। वैसे तो कांग्रेस के पास वर्तमान में जीत के लिए जरूरी 31 से 6 अधिक अर्थात 37 विधायक है जिससे कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर कर्मवीर की जीत में कोई अवरोध नहीं लगता, परन्तु अगर आगामी कुछ दिनों में इस चुनाव में साम-दाम-दंड-भेद का खेल चला तो किसी भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। भाजपा के पास 48 विधायक है अर्थात 31 पहली प्राथमिकता के वोटों के बाद उसके पास 17 सरप्लस वोट हैं, तीन निर्दलीय भी भाजपा का समर्थन कर रहे हैं जबकि दो इनेलो विधायक भी नांदल का समर्थन कर सकते हैं। चूंकि भाजपा में जाने से पहले नांदल इनेलो के ही वरिष्ठ नेता थे, इस प्रकार अगर 16 मार्च को मतदान हुआ तो उसमें कुछ भी हो सकता है।

बहरहाल, इसी बीच हेमंत ने एक ओर रोचक परन्तु महत्वपूर्ण पॉइंट बताते हुए बताया कि सतीश नांदल जो वर्तमान में हरियाणा भाजपा के पांच प्रदेश उपाध्यक्षों में से एक है, अगर वह निर्दलीय के तौर पर राज्यसभा चुनाव जीत जाते है तो उन्हें अपनी पार्टी भाजपा से ही किनारा करना पड़ सकता है। वो बात अलग है कि केन्द्र सरकार उन्हें अपने मंत्रीमंडल में शामिल कर ले।

बकौल हेमंत, भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2 (2) जिसे आमतौर पर दलबदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है, में स्पष्ट उल्लेख है कि सदन का कोई निर्वाचित सदस्य जो किसी राजनीतिक दल द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवार के अलावा किसी अन्य रूप में चुना गया है अर्थात जो निर्दलीय के तौर पर चुनाव जीत कर निर्वाचित हुआ हो, यदि वह ऐसे चुनाव के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसे सदन का सदस्य होने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि नांदल तो राज्यसभा चुनाव लड़ते समय ही हरियाणा भाजपा के कुल पांच में से एक प्रदेश उपाध्यक्ष होने के कारण पहले से ही पार्टी के प्राथमिक सदस्य है तो क्या वह भाजपा में रहते हुए ही निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ सकते हैं, हेमंत ने बताया कि वैसे तो सामान्तय: अगर कोई भाजपा पदाधिकारी या कार्यकर्ता लोकसभा/विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ रहे आधिकारिक पार्टी प्रत्याशी के विरूद्व निर्दलीय के तौर पर चुनावी मैदान में उतरता है तो उसके विरूद्व पार्टी संविधान के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। परन्तु चूंकि यहां एक तो मामला राज्यसभा चुनाव का है और दूसरा नांदल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से ही निर्दलीय के तौर पर राज्यसभा चुनाव लड़ रहे है, इसलिए पार्टी उनके विरूद्व कोई कार्रवाई नहीं करेगी।े

हेमंत के मुताबिक अगर वैधानिक या संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर देखा जाए तो हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल के निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राज्यसभा चुनाव लडऩे में कुछ गलत नहीं है। हालांकि अगर वह निर्दलीय के तौर पर ही चुनाव जीतकर राज्यसभा सांसद निर्वाचित होते हैं तो फिर वह न तो भाजपा के सदस्य बने रह सकते हैं और न ही वह अपने छ: वर्षो के राज्यसभा कार्यकाल दौरान भाजपा में शामिल हो सकते हैं। वो बात अलग है कि वो हरियाणा विधानसभा में तीन निर्दलीय विधायकों की तरह राज्यसभा में केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन दे सकते हैं, वहीं केंद्र सरकार भी उन्हें मंत्रीमंडल में शामिल कर सकती है।

Related posts

शिक्षित युवा को विधायक बनाने के लिए बल्लभगढ़ में उठी भारत भूषण को भाजपा टिकट देने की मांग।

Metro Plus

RWA द्वारा धूमधाम से निकाली गई भगवान गणपति की शोभा यात्रा

Metro Plus

चौ रणजीत सिंह के राजनीतिक अनुभव का लाभ पूरे हरियाणा में लिया जाएगा डॉ अशोक तंवर

Metro Plus