राज्यसभा चुनाव में मंत्री और विधायकों के काउंटिंग एजेंट बनने पर भारतीय चुनाव आयोग मौन!
Metro Plus से Naveen Gupta की विशेष रिपोर्ट।
Chandigarh, 25 मार्च: हरियाणा में 10 अप्रैल को खाली होने जा रही राज्यसभा की दो सीटों को लेकर गत् 16 मार्च को हुए चुनाव विवादों में आ गए हैं। विवाद का कारण विधायकों की क्रॉस वोटिंग या वोटों का रद्द होना नहीं, बल्कि कुछ ओर ही है जिसका खुलासा हम करने जा रहे हैं। अगर विवादों के चलते हरियाणा में राज्यसभा की दोनों सीटों को लेकर गत् 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव रद्द हो जाते हैं तो इसका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को होगा जिसको कि आधी वोट के चलते अपने समर्र्थित निदर्लीय उम्मीदवार की सीट गंवानी पड़ी।
बता दें कि हरियाणा में 16 मार्च को प्रदेश से राज्यसभा की 2 सीटों के निर्वाचन हेतु करवाए गये मतदान में भाजपा के उम्मीदवार संजय भाटिया और कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर सिंह बौद्व निर्वाचित घोषित किये गए थे, जबकि निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़े सतीश नांदल जो हरियाणा भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, उस तरह से चुनाव जीतते-जीतते हार गए थे जैसे सांप-सीढ़ी के खेल में अंतिम पायदान पर आने के बाद गोटी सांप के फन का शिकार होकर वापिस पहले पायदान पर नीचे आ जाती है।
अब आते हैं सीधे-सीधे मुद्दे पर। हरियाणा में दो सीटों पर हुए राज्यसभा चुनावों की मतगणना के दौरान चुनाव में खड़े तीनों उम्मीदवारों द्वारा बनाये गये काउंटिंग एजेंट की योग्यता पर अब एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है।
यहां स्पष्ट कर दें कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आज से करीब 12 वर्ष पूर्व 9 मई, 2014 को देश के सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) को एक निर्देश पत्र जारी किया गया था। इस पत्र के अनुसार किसी भी चुनाव में केन्द्र व राज्य सरकार में मौजूदा मंत्री, सांसद, प्रदेश विधानसभा के मौजूदा विधायकों को मतदान के पश्चात होने वाली मतगणना में काउंटिंग एजेंट नियुक्त नहीं किया जा सकता। यहीं नहीं, उपरोक्त के अलावा शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्ष (जैसे मेयर, नगर परिषद् अध्यक्ष/प्रधान), जिला परिषद एवं ब्लाक/पंचायत समिति के अध्यक्ष/चेयरमैन, राष्ट्रीय/प्रादेशिक जिला सहकारी समितियों के निर्वाचित चेयरमैन, केंद्र और प्रदेश में सार्वजनिक उपक्रमों के चेयरमैन जो राजनीतिक पृष्ठभूमि से हो, सरकारी प्लीडर (वकील) और कोई भी सरकारी कर्मचारी भी चुनाव में किसी उम्मीदवार का काउंटिंग एजेंट नहीं बन सकता है। अर्थात केन्द्र व प्रदेश सरकार में सरकारी लाभ के पद पर विराजमान कोई भी अधिकारी, राजनेता आदि मतगणना में काउंटिंग एजेंट नियुक्त नहीं किए जा सकते।
भारतीय चुनाव आयोग द्वारा 9 मई, 2014 को जारी उपरोक्त निर्देश स्पष्ट रूप से भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जाने हर चुनाव पर लागू है और अब तक उक्त निर्देश जारी होने के बाद आज तक उसमें कोई संशोधन या निरस्तीकरण नहीं हुआ है। बावजूद इसके, हरियाणा में खाली होने जा रही राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए उक्त राज्यसभा चुनाव में दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों-भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौद्व सहित इकलौते निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल द्वारा अपने-अपने काउंटिंग एजेंटों के रूप में प्रदेश सरकार के एक वर्तमान मंत्री और हरियाणा विधानसभा के मौजूदा विधायकों की नियुक्ति की गई जोकि निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देशों का खुला उल्लंघन है। इन्हीं काउंटिंग एजेंटों को लेकर विवाद बन गया है।
बता दें कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने सर्वप्रथम मतगणना के दिन 16 मार्च की रात सवा दस 10.15 बजे जब उपरोक्त चुनाव की मतगणना की प्रक्रिया रुकी हुई थी, उसी समय भारत निर्वाचन आयोग को ई-मेल भेजकर उम्मीदवारों के काउंटिंग एजेंट में मामले हस्तक्षेप की अपील की थी, परन्तु उन्हें कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस विषय को गंभीर बताते हुए कल मंगलवार 24 मार्च एक बार पुन: भारतीय निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी और हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी ए. श्रीनिवास आईएएस और साथ-साथ हरियाणा राज्यसभा चुनाव में रिटर्निंग अधिकारी (आरओ) की ड्यूटी निभा चुके वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल को इस संबंध में रिमाइंडर (स्मरण पत्र) भेजा है। हेमंत ने उक्त सभी से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है ताकि भारतीय निर्वाचन आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनी रहे।
एडवोकेट हेमंत कुमार के उक्त पत्र को यदि भारतीय निर्वाचन आयोग गंभीरता से लेता है तो हरियाणा में खाली होने जा रही राज्यसभा की दो सीटों को लेकर गत् 16 मार्च को हुए चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं, जैसे कि कयास लगाए जा रहे हैं। अगर ऐसा हो जाता है तो इसका सीधा-सीधा फायदा भाजपा समर्थित निदर्लीय उम्मीदवार सतीश नांदल को दोबारा चुनाव होने और फिर से क्रॉस वोटिंग होने पर राज्यसभा सांसद बन कर मिल सकता है।
हाल-फिलहाल इस मामले में गेंद अब भारतीय निर्वाचन आयोग के पाले में आ गई है जिसको कि एडवोकेट हेमंत कुमार के शिकायती पत्र पर अपना फैसला लेना है जिसमें कि उनको उनके ही आदेशों की उल्लंघना के बारे में बताया गया है।








