Metro Plus News
फरीदाबादराष्ट्रीयहरियाणा

हनुमान जयंती 2026: मेहंदीपुर बालाजी धाम में लगती है ‘भूत-प्रेतों की कचहरी’, अर्जी के बाद सुनाया जाता है फैसला

दौसा के मेहंदीपुर बालाजी धाम में भूत-प्रेतों की कचहरी लगने की मान्यता है, जहां अर्जी और पेशी के जरिए बाधा दूर करने की प्रक्रिया होती है। आस्था, रहस्य और अनोखी परंपराओं का यह केंद्र हजारों श्रद्वालुओं को आकर्षित करता है।
दौसा जिले के मेहंदीपुर बालाजी धाम में हर दिन एक ऐसा दृश्य देखने को मिलता है जो किसी भी सामान्य व्यक्ति को सिहरा दे। हजारों की भीड़ के बीच कोई दीवारों पर सिर पटकता है, कोई बाल खींचता है, कोई चीखता-चिल्लाता है तो कोई बेसुध होकर सडक़ों पर भागता नजर आता है। यह सब यहां की उस मान्यता से जुड़ा है जहां भूत-प्रेतों की कचहरी लगती है और फैसला स्वयं बालाजी महाराज सुनाते हैं।

भूत-प्रेत उतारने की मान्यता और ‘पेशी’ की प्रक्रिया:-
जयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित इस धाम में लोगों का विश्वास है कि यहां आने से पहले ही व्यक्ति के भीतर मौजूद प्रेत सक्रिय हो जाता है। मंदिर में अर्जी लगाने के बाद ‘पेशी’ होती है जहां प्रेत को सामने आना पड़ता है। कई बार जिद्दी प्रेत वाले लोगों को पकडक़र लाना पड़ता है क्योंकि उनमें असामान्य ताकत आ जाती है। लेकिन जैसे ही वे बालाजी महाराज की चौखट पार करते हैं उनके शांत होने की बात कही जाती है।

मंदिर परिसर का दृश्य और श्रद्धालुओं की आस्था:-
सुबह के समय मंदिर खचाखच भरा रहता है। लोग दूर-दूर से जल लेने आते हैं जिसे नकारात्मक शक्तियों से बचाने वाला माना जाता है। मंदिर के बाहर और अंदर कई श्रद्वालु असामान्य व्यवहार करते दिखाई देते हैं, जिन्हें वहां मौजूद लोग प्रेत बाधा का असर मानते हैं। वहीं, उनके परिजन तालियां बजाकर और जयकारे लगाकर उनका साथ देते हैं।

तीन प्रमुख देव स्थल और ‘तीन पहाड़’ की मान्यता:-
मेहंदीपुर बालाजी धाम में तीन प्रमुख देवों बालाजी महाराज, प्रेतराज और भैरो बाबा की पूजा होती है। बालाजी का मंदिर तलहटी में स्थित है जबकि प्रेतराज और भैरो बाबा का स्थान पहाड़ों पर है जिसे ‘तीन पहाड़’ कहा जाता है। यहां पंचमुखी हनुमान मंदिर, 12 शिवलिंग, मां मनसा देवी, पितांबरी माता और अंजनी माता सहित कई देवस्थल मौजूद हैं। महंत के अनुसार, कई प्रतिमाएं स्वयंभू हैं और उनके प्रकट होने का इतिहास अज्ञात है।

रहस्यमयी पहाड़ और प्राचीन मान्यताएं:-
तीन पहाड़ क्षेत्र में एक प्राचीन नीम का पेड़ है जिसे काटने की हर कोशिश असफल बताई जाती है। वहीं, यहां ताले बांधने की परंपरा भी है जिसमें माना जाता है कि प्रेत को ताले में कैद कर दिया जाता है। मंदिर परिसर में चाबुक भी रखा जाता है जिसे पहले जिद्दी प्रेत को काबू करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, हालांकि अब इस परंपरा को बंद बताया जाता है।

भैरो बाबा को चढ़ाई जाती है शराब और सिगरेट:-
मंदिर के एक हिस्से में स्थित श्री महाकाल भैरो मंदिर में प्रेत बाधा दूर करने की प्रक्रिया के दौरान शराब और सिगरेट चढ़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे भैरो बाबा प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा नारियल,नींबू और सफेद धागे का उपयोग कर विशेष विधियों से ‘बंधन काटने’ की प्रक्रिया की जाती है।

Related posts

श्मशान घाट गांव के बाहर नहीं बीचों-बीच चौराहे पर होना चाहिए: संत मुनिश्री तरुणसागरजी

Metro Plus

जिला उपायुक्त द्वारा फरीदाबाद में 103 कंटेनमेट जोन, वाले इलाको को 20 जोन में बाटा गया

Metro Plus

गुरू सेवक संघ द्वारा 14 अप्रैल को बैसाखी का उत्सव मनाया जाएगा

Metro Plus