10 अप्रैल, 2023 को हुई उपायुक्त पद पर तैनाती, जुलाई-2024 से पर्यावरण विभाग के निदेशक का भी अतिरिक्त कार्यभार
जिले में लगातार 4 वर्ष तक डीसी रहने का रिकॉर्ड एमआर आनंद के नाम: हेमंत
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh/Panipat, 11 अप्रैल: हरियाणा कैडर के 2013 बैच के आईएएस अधिकारी वीरेन्द्र कुमार दहिया ने बतौर जिला उपायुक्त पानीपत इस पद पर निरंतर रहते हुए बिना किसी विवाद के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा कर एक रिकॉर्ड रच दिया हैं। गत् 10 अप्रैल, 2023 को वीरेन्द्र दहिया को पानीपत डीसी के पद पर तैनात किया गया था। इसके सवा वर्ष पश्चात जुलाई, 2024 में उन्हें प्रदेश के पर्यावरण विभाग के निदेशक एवं विशेष सचिव, पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभाग के पद का भी अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया जो आज तक भी उन्हीं के पास है। इससे पहले फरीदाबाद के जिला उपायुक्त के तौर पर 2014 बैच के विक्रम सिंह यादव ने भी 3 वर्ष से ज्यादा का कार्यकाल पूरा किया था।
बता दें कि अपने तीन वर्षों से ज्यादा के सफल/निर्विवाद कार्यकाल में डीसी वीरेन्द्र कुमार दहिया ने बतौर जिला निर्वाचन अधिकारी लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम के चुनाव बिना किसी भेदभाव और विवाद के पूरे कराएं हैं जोकि उनकी कार्यकुशलता को दर्शाता है। हालांकि चुनाव आयोग के अनुसार चुनावों के दौरान चुनाव से संबंधित कोई भी अधिकारी उसे जिले में नहीं रह सकता हैं जहां उसे तैनात/नियुक्त हुए तीन साल पूरे हो गए हों। इसी के चलते कई अधिकारियों का पानीपत से दूसरे जिलों में तबादला भी हो चुका हैं। इस मामले में डीसी वीरेन्द्र कुमार दहिया की खुदकिस्मती भी है कि उनकी पोस्टिंग उस समय हुई जब कोई चुनाव नहीं थे और उनके कार्यकाल के दौरान ही उक्त सभी चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए। अब चूंकि सन् 2029 तक कोई चुनाव नहीं हैं तो ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि वो अभी बतौर जिला उपायुक्त एक लंबी पारी खल सकते हैं। वैसे भी उपायुक्त वीरेन्द्र दहिया की रिटायरमेंट अगले वर्ष 31 मई, 2027 को निर्धारित है।
बता दें कि पानीपत जिले के मौजूदा उपायुक्त वीरेन्द्र दहिया करीब 25 वर्ष पूर्व जनवरी, 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओपी चौटाला की सरकार के दौरान सीधी भर्ती के जरिए हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) एचसीएस (ईबी) अधिकारी के तौर पर नियुक्त हुए थे एवं मई, 2019 में प्रमोट होकर वह आईएएस बने थे। एचसीएच से पहले वे खाद्वय एवं आपूर्ति विभाग में थे और फरीदाबाद में भी बतौर डीएफएससी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पानीपत जिले के डीसी पद पर तैनाती से पूर्व दहिया हरियाणा के किसी अन्य जिले में उपायुक्त पद पर तैनात नहीं रहे थे।
यहां यह भी लिखना रोचक है कि दहिया से पूर्व पानीपत के पिछले चार उपायुक्त सुशील सारवान, धर्मेन्द्र सिंह, हेमा शर्मा और सुमेधा कटारिया भी एचसीएस से प्रमोट होकर आईएएस बने थे। हालांकि समीरपाल सरो भी अलग -अलग अवधि दौरान दो बार पानीपत डीसी रहे परंतु उनका कुल कार्यकाल भी 3 वर्ष नहीं रहा था।
हाईकोर्ट में एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के मुताबिक सवा 36 वर्ष पूर्व दिसम्बर,1989 में जब पानीपत को करनाल जिले में से निकाल कर अलग जिला बनाया गया था तो आज तक पानीपत में तैनात रहे 29 उपायुक्तों में से केवल एमआर आनन्द ही ऐसे अकेले आईएएस अधिकारी थे जो पानीपत में करीब चार वर्ष अर्थात अप्रैल, 2000 से फरवरी, 2004 तक डीसी पद पर रहे थे।
बकौल हेमंत, हरियाणा में कुछ वर्षों पहले तक आईएएस अधिकारियों का सामान्यत: दो-अढ़ाई से तीन वर्षो तक प्रदेश के किसी जिले के डीसी पद पर तैनात रहना सामान्य बात होती थी परन्तु विगत समय में डीसी पद पर तैनाती के लिए आईएएस अधिकारियों में बड़े स्तर पर लॉबिंग होती है जिससे यह देखने में आया है कि कई बार तो किसी जिले में एक वर्ष में ही दो से तीन बार जिले का उपायुक्त का तबादला हो जाता है।
बकौल हेमंत, जब भी कोई व्यक्ति आईएएस अधिकारी बनता है, बेशक वह यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग)े द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित आल इंडिया सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर अर्थात सीधी भर्ती में चयनित होकर आईएएस बना हो अथवा प्रदेश सिविल सेवा (एससीएस) से प्रमोट होकर या गैर-राज्य सिविल सेवा (नॉन.एससीएस) कोटे से चयनित होकर आईएएस बना हो, उसकी सबसे पहले यही चाह होती है कि वह जल्द ही अपने प्रदेश के किसी जिले का डीसी तैनात हो।
बहरहाल, हेमंत ने हरियाणा के सभी जिलों में मौजूदा तैनात डीसी के आधिकारिक रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद बताया कि वर्तमान में प्रदेश के कुल 23 जिलों में से केवल 7 में डीसी के पद पर एचसीएस से पदोन्नत होकर अथवा नॉन-एचसीएस कोटे से चयनित होकर आईएएस बने अधिकारी तैनात हैं। वहीं प्रदेश के 16 जिलों में यूपीएससी की सीधी भर्ती में चयनित होकर आईएएस नियुक्त हुए एवं जिन्हें हरियाणा कैडर आवंटित हुआ, वह बतौर जिलों के डीसी तैनात हैं। हालांकि कुछ वर्ष पूर्व प्रदेश में एचसीएस से प्रमोट होकर आईएएस बने अधिकारियों का जिले के डीसी के पदों पर बोलबाला था जो स्थिति गत कुछ समय में विपरीत हो गयी है।
वर्तमान में प्रदेश के 5 जिलों-महेंद्रगढ़, पानीपत, चरखी दादरी, हिसार और पंचकूला के डीसी पद पर तैनात अधिकारी एचसीएस से पदोन्नत होकर आईएएस बने अधिकारी बतौर डीसी तैनात हैं। इन सभी को आईएएस में पदोन्नति के साथ ही हरियाणा कैडर अलॉट किया गया था। महेंद्रगढ़ में 2012 बैच के मनोज कुमार-1, पानीपत में 2013 बैच के वीरेंद्र कुमार दहिया, चरखी दादरी में 2016 बैच के डॉ. मुनीश नागपाल, हिसार में 2017 बैच के महेंद्रपाल और पंचकूला में 2017 बैच के सतपाल शर्मा बतौर डीसी तैनात हैं। प्रदेश के दो जिलों पलवल और फतेहाबाद में गैर-राज्य सिविल सेवा कोटे से चयनित होकर आईएएस बने अधिकारी उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। पलवल जिले में 2016 बैच के डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ और फतेहाबाद में डॉ. विवेक भारती जो दोनों नॉन-एचसीएस कोटे से आईएएस बने थे, बतौर डीसी तैनात हैं।
हालांकि देश के कई राज्यों में आईएएस में सामान्यत: 9 वर्ष से 16 वर्ष की सेवा वाले आईएएस अधिकारी को अर्थात जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड के आईएएस अधिकारियों को जिले का डीसी तैनात किया जाता है। हालांकि हरियाणा में हालिया वर्षो में 9 वर्षो से कम सेवा वाले आईएएस अधिकारियों को भी जिले का डीसी तैनात किया जाता रहा है। वर्तमान में 2018 बैच के चार आईएएस जबकि 2019 बैच का एक आईएएस हरियाणा के अलग-अलग जिलों में बतौर जिला उपायुक्त तैनात हैं।






