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संस्कृति के सरंक्षण में साहित्य की अहम भूमिका है: सीमा त्रिखा

मैट्रो प्लस
फरीदाबाद, 23 मई (नवीन गुप्ता): संस्कृति के सरंक्षण में साहित्य की अहम भूमिका है जो समय, काल, परिस्थिति अनुसार युगों-युगों से अपने कर्तव्य का निर्वाह कर रही है। साहित्य से जुड़े साहित्यकार, लेखक, कवि-कवियत्री इस कर्तव्य बोध के लिए साधुवाद के पात्र है, जो अराजकता, आतंकवाद, अमन-शांति की बहाली, नारी-उत्थान तो गरीबी तो कभी राष्ट्रवाद जैसे विषयों पर अपनी लेखनी के माध्यम से विश्व में प्रकाश का दीपक जला रहे हैं। यह विचार मुख्य संसदीय सचिव श्रीमति सीमा त्रिखा ने डीएवी शताब्दी कॉलेज एनएच-3 के प्रांगण में यूथ ऑफ युनिवर्स एवं पीपल्ज पार्लियामैंट फरीदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में ख्याति प्राप्त कवियत्रि आशिमा कौल की काव्यकृति जन्नत-ए- काश्मीर पुस्तक की परिचर्चा के अवसर पर साहित्य जगत से जुड़े उपस्थित जनों से रूबरू होते हुए कहे। श्रीमति सीमा त्रिखा ने कहा कि साहित्य जगत से जुड़े विद्वानों व विदुषियों ने विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान की जो अलख जगा कर विश्व कल्याण की भावना से समाज को जो दिया है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए वो कम है। कवियत्री आशिमा कौल द्वारा रचित जन्नत-ए-काश्मीर काव्य-कृति पर अपना उद्बोधन देते हुए उन्होंने कहा कि हिंदु-मुस्लिम एकता, अपनी जन्मभूमि कश्मीर की पवित्र माटी के मान-सम्मान में लिखी रचनाएं व सीमा के प्रहरी जैसे विषयों पर आशिमा कौल का गहन चिंतन व मनन नि:संदेह बधाई के पात्र हंै। उपस्थित साहित्यकारों ने पुस्तक की परिचर्चा के दौरान आशिमा कौल की काव्य कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि कश्मीर के सौंदर्य, आतंकवाद की त्रासदी का मार्मिक वर्णन औद्योगिक प्रगति के दौर मेें संवेदनाओं का जीवंत उदाहरण है। आशिमा कौल ने अपनी कृति के बारे में कहा कि उक्त विषयों पर उनकी यह काव्यकृति भावों की अभिव्यक्ति मात्र है, जिसका उद्वेश्य भावों के पीछे छिपे चिंतन व मनन को आम जन तक पहुंचाना है। इस अवसर पर डॉ० बलदेव वंशी, ज्योतिसंघ, सतीश कौल, डॉ० मुक्ता मदान, कमल कपूर, डॉ० बद्रीनाथ कल्ला, अजूं दुआ, एनएल गोसांई, डॉ० सतीश आहुजा, अर्चना भाटिया, प्रकाश लखानी, हरीश मोहन, पीएन पंडिता, अंबादत्त भट्, इंदु गुप्ता, माधुरी, राघव सैनी, डॉ० जसवंत सिंह, प्रकाश लखानी, प्रकाश चंद फुलेरिया सहित साहित्य जगत से जुड़े अन्य साहित्यकारों ने परिचर्चा में भाग लिया ।

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