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दलित मां की कोख से जन्म लिया है महापौर पद की दावेदार निगम पार्षद सुमन बाला ने !

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
फरीदाबाद, 21 जनवरी: महापौर पद की लड़ाई को लेकर आजकल जहां पक्ष-विपक्ष निगम पार्षद सुमन बाला पर उनके अनुसूचित जाति के ना होने तथा उनके सर्टिफिकेट के फर्जी होने का आरोप लगाकर उन्हें इस दौड़ से बाहर निकालने की कोशिश कर रहा हैं। वहीं दूसरी तरफ सुमन बाला ने सबको यह कहकर चुप करा दिया है कि उन्हें किसी से किसी भी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं हैं। उनके अनुसूचित होने का सबसे बड़़ा सबूत तो यह है कि उन्होंने अपनी दलित मां की कोख से जन्म लिया है, इससे बड़ा सबूत पूरी दुनिया में कुछ नहीं हो सकता। सुमन ने यह कहकर अपने प्रतिद्वंदियों के मुंह पर ताला लगाने का काम किया है। सुमन बाला को कहना है कि महापौर पद को लेकर उनकी मजबूत दावेदारी से घबराकर उनके विरोधी उनके अनुसूचित ना होने का अनर्गल प्रचार करने में लगे हुए हैं जिनमें तनिक भी दम नहीं है।
सुमन बाला का यह भी कहना है कि यदि उनके अनुसूचित होने के जुलाहा होने के सर्टिफिकेट फर्जी हैं तो मेरे खिलाफ झुठा प्रचार करने वालों ने उस समय यह मामला क्यूं नहीं उठाया जब मैंने वार्ड नं.-12 से अपना नामांकन भरा था। उस समय तो किसी की आवाज नहीं निकली। और आज जब मैं निगम पार्षद बनने के बाद मेयर बनने जा रहीं हूं तो चुनावों में हारे हुए उम्मीदवारों के पेट में दर्द उठने लगा है। सुमन का कहना है कि नामांकन के बाद संबंधित अधिकारियों ने सारे दस्तावेज चैक करने के बाद ही उन्हें चुनाव लडऩे की परमिशन दी थी
गौरतलब रहे कि इससे पहले निगम पार्षद धनेश अदलखा भी महापौर पद की दावेदार सुमन बाला के सर्टिफिकेट को सही ठहरा चुके हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं वार्ड-33 से चुनाव जीते नवनिवार्चित पार्षद धनेश अदलक्खा ने सुमन बाला के जाति प्रमाण पत्रों की वकालत करते हुए कहा था कि सुमन बाला जुलाहा जाति से सम्बन्ध रखती है और उसके स्कूली सर्टिफिकेट्स और अन्य दस्तावेजों में उसे जुलाहा जाति से संबंधित दिखाया गया है ऐसे में हारे हुए विरोधी जानबूझकर अफवाहें फैला रहे है।
घ्यान रहे कि बहुमत से जीती बीजेपी में अब मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए उठा-पटक चल रही है। इसके लिए फरीदाबाद के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे है क्योंकि नगर निगम फरीदाबाद की 40 सीटों के लिए सम्पन्न हुआ चुनाव कृष्णपाल गुर्जर के नेतृत्व में लड़ा गया था जिसमे बीजेपी ने 29 सीटें हासिल की थी। चूंकि इस बार मेयर का पद अनूसूचित जाति के लिए आरक्षित है ऐसे में वार्ड-12 से अनूसूचित जाति की सीट पर चुनाव जीती सुमन बाला मेयर पद के लिए प्रबल दावेदार मानी जा रही है क्योंकि वह बी.कॉम पास है और शिक्षित है। वहीं मेयर की प्रबल दावेदार होने के नाते अब उनके सामने हारे हुए उम्मीदवार यह दावा कर रहे है की सुमन बाला की जाति जुलाहा नहीं है जबकि उनके पास उनके पिता का 1976 में बना जुलाहा जाति का प्रमाण पत्र आज भी मौजूद है। यहीं नहीं सुमन बाला के सभी स्कूली सर्टिफिकेट्स में उन्हें जुलाहा जाति से संबंधित दिखाया गया है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पार्षद धनेश अदलक्खा ने कहा था कि हारे हुए विरोधी जानबूझकर गलत अफवाहें फैला रहे है। उन्होंने सुमन बाला के सभी स्कूली सर्टिफिकेट्स भी प्रस्तुत किये और उनकी जाति के खिलाफ किये जा रहे आरोपों को दुष्प्रचार करार दिया। उन्होंने कहा की भाजपा ने सुमन बाला को टिकट देने से पहले ही उसके जाति प्रमाणपत्रों को जांच लिया था।
स्मरण रहे है कि नगर निगम के सम्पन्न हुए चुनाव में भाजपा के अनूसूचित जाति से संबंधित तीन उम्मीदवार विजयी होकर आये है जिनमें से एक उम्मीदवार मेयर की आरक्षित सीट पर बैठेगा जिनमें सुमन बाला प्रबल दावेदार के रूप में सबसे आगे चल रही है। इसी कारण सुमन बाला पर उसकी जाति को लेकर यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि उसके द्वारा प्रस्तुत किया गया जुलाहा जाति का सर्टिफिकेट नकली है। हालांकि बीजेपी ने इन सब आरोपो को सिरे से खारिज कर दिया है।
इस मामले में साथी पार्षदों द्वारा की जा रही वकालत के बाद यह लगभग तय हो गया है कि भाजपा में सुमनबाला के नाम पर आम सहमति बन चुकी है। देखना तो अब यह है कि इस बात की औपचारिक घोषणा कब होती है

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