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AAP के दर्शकों ने पीएम की चुप्पी पर उठाए कई सवाल

मैट्रो प्लस से महेश गुप्ता की रिपोर्ट
नईदिल्ली/फरीदाबाद, 10जून: मंदसौर में पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत के बाद भड़की हिंसा के चलते किसानों का विरोध प्रदर्शन और हिंसक हो चला है। उपद्रवियों ने एक टोल प्लाजा में तोडफ़ोड़ की और वहां रखे 8,10 रुपए लूट लिए। दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मंदसौर दौरे पर जा रहा है। 10 जून से वे किसानों के हक में देश भर में प्रदर्शन करेंगे।
राहुल भी मिले किसानों से:
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों से मिलने के लिए मंदसौर गए थे लेकिन पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। राहुल ने वापिसी में उदयपुर लौटते वक्त बॉर्डर पर ही कुछ किसानों से मुलाकात भी की।
मोदी सरकार किसानों को देती है गोली:
राहुल ने गिरफ्तारी से पहले संवाददाताओं से बातचीत में मोदी सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा की मोदी सरकार देश के सबसे अमीरों के डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर सकती है। लेकिन किसानों का नहीं किसानों के कर्ज माफ नहीं करती उन्हें फसल के सही दाम नहीं देती मोदी सरकार किसानों को बस गोली देती है।
एसडीएम से की मारपीट:
नाराज किसानों ने शाजापुर कृषि मंडी में एक ट्रक और चार मोटर साइकिलों में आग लगा दी। आंदोलनकारियों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एसडीएम राजेश यादव से मारपीट भी की जिससे उनके पैर की हड्डी टूट गई। इसी तरह देवास में एक ट्रक को उपद्रवियों ने आग लगा दी। इस बीच बढ़ती हिंसा के चलते भोपाल-इंदौर मार्ग पर बसों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
AAP ने पीएम की चुप्पी पर उठाए सवाल:
आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में किसानों के आंदोलन का कारण केंद्र और राज्य सरकारों की किसानों के प्रति उदासीनता है। संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा यूरोप,अफगानिस्तान या पाकिस्तान में अगर कोई छोटी सी घटना भी होती है तो दुनिया में इस पर ट्वीट करने वाले पहले शख्स हमारे पीएम होते हैं। वह सबसे पहले इन पर बोलते हैं लेकिन उन्होंने किसानों की मौत पर एक शब्द भी नहीं बोला।
सरकार ने माना पुलिस ने किसानों पर फायरिंग:
मध्य प्रदेश में 1 जून से किसानों का आंदोलन चल रहा है। इस बीच पुलिस फायरिंग में पांच किसानों की मौत ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया। हालांकि पहले सरकार इंकार कर रही थी कि पुलिस फायरिंग में किसानों की मौत हुई लेकिन सरकार ने माना पुलिस फायरिंग में किसानों की मौत हुई। साथ सरकार ने कहा कि भीड़ काबू में नहीं आ रही थी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। बस उसी के चलते पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी।



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