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अमर बंसल दोबारा निर्विरोध बने श्री नीलकंठ महादेव मंदिर के प्रधान

नवीन गुप्ता
फरीदाबाद, 26 अक्टूबर
: श्री नीलकंठ महादेव मंदिर सैक्टर-8 के प्रधान पद के चुनाव यहां मंदिर परिसर में रविवार को सौह्वादपूर्ण माहौल में संपन्न हुए। मंदिर के आजीवन सदस्यों की मौजूदगी में प्रधान पद के लिए हुए इस चुनाव में अमर बंसल को ही उनके कार्यो को देखते हुए एक बार पुन: सर्वसम्मति से मंदिर समिति का प्रधान चुन लिया गया। मंदिर की इस समिति में करीब 260 आजीवन सदस्य हैं। हालांकि मंदिर के प्रधान पद के लिए जेएल हांडा भी चुनाव मैदान में उतरे थे लेकिन उन्होंने अमर बंसल के पक्ष में अपना नाम वापिस ले लिया था जिसके चलते अमर बंसल को निर्विरोध प्रधान घोषित कर दिया गया। समिति के आजीवन सदस्यों का मानना था कि पिछले करीब 20 वर्षों से श्री नीलकंठ महादेव मंदिर से जुड़े अमर बंसल ने अपने कार्यकाल में मंदिर के विकास आदि में जितना योगदान दिया है वह सराहनीय है।
श्री नीलकंठ महादेव मंदिर का इतिहास:-
सैक्टर-8 में स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर भगवान शिव जी के नाम से ही है। इस मंदिर में समय-समय पर भागवत पाठ, होली महोत्सव तथा रामायण पाठ भी किया जाता है। मंदिर में भगवान शिव के अलावा अन्य देवी-देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर में हर त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। इस मंदिर की स्थापना लगभग 25 वर्ष पहले की गई थी। शुरुआती दौर में समाजसेवी कैप्टन आरके शर्मा, विजय शर्मा, ओपी अग्रवाल मंदिर से जुड़े थे। समाज में सद्भाव का संदेश देने के मकसद से मंदिर कमेटी की ओर से हर वर्ष होली महोत्सव मनाया जाता है। मंदिर में पहले शिवलिंग स्थापित किया गया था। इन दिनों मंदिर में मां दुर्गा दरबार, हनुमान जी, राधा, कृष्ण तथा राम दरबार भी है। मंदिर का विशेष आकर्षण तिरुपति बाला जी की मूर्ति हैं। धर्म-संस्कृति के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मंदिर कमेटी की ओर से रामायण पाठ का आयोजन किया जाता है। इनके अलावा सामाजिक कार्यों में भी मंदिर कमेटी अहम् भूमिका निभाती है।
श्री नीलकंठ महादेव मंदिर फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र के ऐतिहासिक गांव सिही के नजदीक सैक्टर-8 में स्थित है। मंदिर आने के लिए मथुरा रोड स्थित वाईएमसीए चौक से होते हुए पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा बाईपास रोड होते हुए भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने की भी व्यवस्था है। मंदिर कमेटी ने पिछले पांच वर्षों में कई कार्य किए हैं। इसी दौरान मंदिर में तिरुपति बाला जी की मूर्ति स्थापित की गई है। सावन के महीने में मंदिर में मेला लगता है। इस महीने में कांवडिय़े आकर जलाभिषेक करते हैं। कांवडिय़ों के लिए मंदिर में विशेष शिविर लगाए जाते हैं।
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