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लैबोरेटरी, मोबाइल टेस्टिंग बेहतर बनाने और खाद्य एवं औषधि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में डॉ. सुमिता मिश्रा ने उठाए कड़े कदम!

हरियाणा ने एनसीआर में 53 करोड़ रुपये के राशि से खाद्य एवं औषधि सुरक्षा अवसरंचना बढ़ाई

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।

चंडीगढ़, 16 फरवरी: हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में खाद्य एवं औषधि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने एवं नियमित रूप से असवसरंचना को बेहतर बनाने के लिए 53.21 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इनमें 28 मोबाइल खाद्य टेस्टिंग लैबोरेटरी वैन लगाना और करनाल में जिला खाद्य लैबोरेटरी को मॉडर्न बनाना शामिल है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि यह पहल नागरिकों के लिए तेज, साइंटिफिक और आसानी से मिलने वाली खाद्य टेस्टिंग सर्विस को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम है।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि करनाल में जिला खाद्य टेस्टिंग लैबोरेटरी को राज्य बजट से 90.29 लाख रुपये और फूड सेफ्टी एंड स्टैंडड्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से 50 लाख रुपये के अतिरिक्त बजट से बड़े स्तर पर नवीनीकरण किया जा रहा है। इसमें लैबोरेटरी की क्षमता को मजबूत करने के लिए 10.50 लाख रुपये की लागत से 47 मॉडर्न लैबोरेटरी उपकरण षामिल किये गये है। हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से 4.63 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे जा रहे हैं और इसकी टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इसके अलावा करनाल लैबोरेटरी को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडड्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से 3.96 करोड़ रुपये की लागत से एक डेडिकेटेड माइक्रोबायोलॉजी सेक्शन के साथ अपग्रेड किया गया है।

उन्होंने बताया कि एनसीआरपीबी चंडीगढ़ में नई दिल्ली से उपलब्ध राशि से 4.44 करोड़ रुपये की लागत से एक माइक्रोबायोलॉजी लैब बनाने का काम चल रहा है और यह कार्य 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है जो मार्च 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। सेंट्रल-स्टेट शेयर ग्रांट से 10.45 करोड़ रूपये चंडीगढ़ में फूड लैब के नवीनीकरण का काम पूरा हो गया है और लैबोरेटरी को तीन हाई एंड इक्विपमेंट के साथ अपग्रेड किया गया है। हरियाणा में चंडीगढ़ और करनाल में दो नोटिफाइड फूड टेस्टिंग लैब हैं, दोनों फूड सेफ्टी एंड स्टैंडड्र्स एक्ट और 2006 के सेक्शन 43(1) के तहत एनएबीएल व से एफएसएसएआई से मान्यता प्राप्त हैं। राज्य को दूध और डेयरी उत्पादन को खाने का एक बड़ा हिस्सा मानते हैं और हरियाणा खिलाडिय़ों के लिए एक बड़ा हब है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि पूरे राज्य में हाई-क्वालिटी फूड स्टैंडड्र्स को मजबूत करने के लिए अलग-अलग फेज में आठ स्टेट ऑफ द आर्ट फूड टेस्टिंग लैब्स बनाई जाएंगी।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि हाइजीनिक स्ट्रीट फूड कल्चर को बढ़ावा देने के लिए अंबाला, करनाल, हिसार और गुरूग्राम को स्वच्छ गली खाद्य हब फूड के लिए चुना गया है। अंबाला के गांधी ग्राउंड अंबाला कैंट में 60 दुकानों वाला स्ट्रीट फूड हब बनाया जा रहा है और यह फरवरी 2026 तक पूरा हो जाएगा। हिसार में लगभग 60 प्रतिषत काम पूरा कर लिया है और इस प्रोजेक्ट को चालू वित वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। करनाल के विश्वकर्मा चौक पर वेस्टर्न यमुना कैनाल के पास जमीन की पहचान कर ली गई है और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट को मंजूरी दे दी गई है जिसे 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य है। गुरूग्राम में प्रोजेक्ट टेंडरिंग प्रक्रिया जारी है।

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडड्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा प्रदान की गई पांच मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी वैन पहले से ही जिलों में चल रही हैं जो मामूली 20 रुपए प्रति सैंपल पर मौके पर ही फूड टेस्टिंग की सुविधा प्रदान कर रही हैं। एनसीआर इलाकों में 28 नई वैन जुडऩे से बाहरी नागरिकों की पहुंच काफी बढ़ेगी।

डॉ. मिश्रा ने बताया गया कि 2025 में स्टेट ड्रग्स लेबोरेटरी को मजबूती से लागू करने पर भी बल दिया गया। 1 जनवरी से 31 दिसंबर, 2025 के बीच 6,266 दवा के सैंपल लिए और 5,063 का विश्लेषण किया गया जो बेहतर निपटान क्षमता को दिखाता है। विभाग ने 14,910 दवा सेल यूनिट्स का इंस्पेक्शन किया और 764 लाइसेंस सस्पेंड किए जबकि सजा के तौर पर कार्रवाई के बाद 80 लाइसेंस रद्द कर दिए गए। कुल 4,916 नमूने में 3,417 टैस्ट किए जिनमें से 11 को सब-स्टैंडर्ड पाए गए।

विभागीय कार्यवाई के दौरान 315 संयुक्त रेड कर 593 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की जांच की गई। इसमें पांच मैन्युफैक्चरिंग या ब्लड सेंटर लाइसेंस निलम्बित किए गए जबकि दवाएं, मेडिकल डिवाइस और कॉस्मेटिक्स के 52 नए मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस दिए गए। सात यूनिट्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन और जीएमपी स्टैंडड्र्स पर अपग्रेड किया गया जिससे हरियाणा का फार्मास्युटिकल कम्प्लायंस फ्रेमवर्क मजबूत हुआ। साल के दौरान कोर्ट में 56 केस चलाए गए जिनमें 15 मामलों में से आठ में सजा हुई। विभाग द्वारा दवा की ज्यादा कीमत के 33 मामलों में सुधार और रोकथाम की जरूरतों का पालन न करने के कारण 68 उत्पादन की अनुमति निलम्बित कर दी गई।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि लैबोरेटरी मॉडर्नाइजेशन, मोबाइल टेस्टिंगए सख्त एनफोर्समेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का मिलजुल कर कार्य करना हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग की सुरक्षा और उपभोक्ता के प्रति विश्वास को दिखाता है। उन्होंने कहा कि एडवांस्ड टेस्टिंग सुविधाएं, बढ़ी हुई मोबाइल आउटरीच और मजबूत रेगुलेटरी निगरानी के साथ हम यह सुरक्षित खाना और अच्छी क्वाालिटी की दवाएं हर घर तक पहुंचें सुनिश्चित कर रहे हैं।



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