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HIV/Aids के खिलाफ डॉ. सुमिता मिश्रा ने की अपनी लड़ाई तेज, पूरे राज्य में इलाज का नेटवर्क बढ़ाया

हरियाणा में 12 लाख से ज्यादा लोगों का एचआईवी टेस्ट किया
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 19 फरवरी:
हरियाणा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि हरियाणा ने एचआईवी/एड्स के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेजी से बढ़ाते हुए चालू वित्तीय वर्ष में 12.40 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया और राज्य के हर कोने में मरीजों तक पहुंचने के लिए उपचार के बुनियादी ढाचें का विस्तार किया है।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच 12 लाख, 40 हजार, 205 लोगों की एचआईवी जांच की गई जिनमें से 5,877 व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। राज्य में वर्तमान में 104 एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र (ICTC) संचालित हैं, जिनमें फरीदाबाद में एक मोबाइल इकाई भी शामिल है। इन सभी केंद्रों पर नि:शुल्क एवं गोपनीय सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। डॉ. मिश्रा ने बताया कि सरकार की प्राथमिकता है कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक बिना किसी भेदभाव के जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

इस वित्त वर्ष में राज्य ने मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 5 लाख, 65 हजार, 830 गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच की गई जिनमें से 613 महिलाएं एचआईवी पॉजिटिव पाई गईं और उन्हें समय पर उपचार से जोड़ा गया जो एचआईवी/एड्स के ऊध्र्वाधर संचरण के उन्मूलन में मदद करता है।

उपचार सुविधाओं के विस्तार के तहत राज्य में 24 एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) केंद्र रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, हिसार, अंबाला और मेवात सहित प्रमुख जिलों में संचालित हैं । इनमें से 13 नए केंद्र मेडिकल कॉलेजों में स्थापित किए गए हैं जिससे मरीजों को उन्नत उपचार सुविधाएं अपने निकट ही उपलब्ध हो रही हैं और उन्हें लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही। इसके अतिरिक्त 5 फैसलिटी इंटीग्रेटेड एआरटी केंद्र तथा 4 लिंक एआरटी केंद्र भी कार्यरत हैं। वर्तमान में राज्यभर में कुल 40,851 मरीज जीवन रक्षक उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

एचआईवी/एड्स के साथ जीवन यापन कर रहे व्यक्तियों (PLHIV) पर आर्थिक बोझ कम करने और उपचार अनुपालन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने दिसंबर 2021 में मासिक वित्तीय सहायता योजना शुरू की थी, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को 2,250 रुपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते हैं। अब तक इस योजना के अंतर्गत 54.3 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। पंजीकृत मरीजों को नि:शुल्क फॉलो-अप देखभाल तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी उन्नत जांच सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

एचआईवी के अतिरिक्त राज्य यौन संचारित संक्रमणों (STI) की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसके लिए 31 नामित क्लीनिकों में नि:शुल्क परामर्श, सिफिलिस जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। साथ हीए रेडक्रॉस सोसाइटी और गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से 42 लक्षित हस्तक्षेप परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं जो उच्च जोखिम समूहों-जैसे महिला यौन कर्मी, पुरुष-पुरुष यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति, अंत:शिरा नशीली दवाओं का सेवन करने वाले, ट्रक चालक एवं प्रवासी मजदूरों के साथ कार्य कर रही हैं। इन परियोजनाओं के तहत नियमित स्वास्थ्य जांच, प्रत्येक छह माह में एचआईवी जांच तथा कंडोम वितरण सुनिश्चित किया जाता है। ओपिओइड पर निर्भर व्यक्तियों के लिए राज्य में 12 ओपिओइड प्रतिस्थापन चिकित्सा (OST) केंद्र और 3 उपग्रह इकाइयां संचालित हैं। वर्तमान में 9,014 मरीज पंजीकृत हैं जिनमें से 4,569 नियमित उपचार प्राप्त कर रहे हैं।

जन जागरूकता के क्षेत्र में भी राज्य ने व्यापक अभियान चलाया है। रेडियो जिंगल, रेलवे स्टेशनों पर डिजिटल डिस्प्ले, सिनेमा विज्ञापन, एसएमएस अभियान और सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों में रेड रिबन क्लबों के माध्यम से 3,397 स्कूलों और 429 कॉलेजों में रैलियां, मैराथन और जागरूकता प्रश्नोत्तरी आयोजित कर संदेश पहुंचाया गया है।

इसके अतिरिक्त परिवहन विभाग, कृषि विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), उत्तरी रेलवे तथा महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है। मुख्यधारा में लाने की पहल (Mainstreaming Initiative) के तहत अब तक 49,120 व्यक्तियों को जागरूक किया जा चुका है।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि कार्यक्रम का व्यापक दायरा और समन्वय राज्य की इस दृढ़ प्रतिबद्वता को दर्शाता है कि एचआईवी संक्रमण की दर को कम किया जाए, संक्रमित व्यक्तियों को सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुनिश्चित की जाए तथा एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रगति की जाए।



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