गैर-सरकारी सेवा पृष्ठभूमि से व्यक्ति की नए सदस्य के तौर पर की नियुक्ति संभव .. एडवोकेट
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 17 अप्रैल: हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में मेम्बर का एक पद रिक्त हो रहा है। साढ़े तीन वर्ष पूर्व 23 सितम्बर, 2022 को आयोग में सदस्य के तौर पर नियुक्त राजेंद्र कुमार का कार्यकाल गुरूवार 16 अप्रैल को पूरा हो रहा है। आयोग में सदस्य बनने से पूर्व राजेंद्र प्रदेश सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग से वर्ष 2022 में प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के मुताबिक देश के संविधान के अनुच्छेद 316 (2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग में चेयरमैन और सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति के छ: वर्षों तक या उनकी आयु के 62 वर्ष होने तक जो भी पहले हो, होता है। चूंकि आयोग में मौजूदा सदस्य राजेंद्र इसी माह 62 वर्ष के हो रहे है इसलिए उनका कार्यकाल उनकी नियुक्ति के छ: वर्ष तक अर्थात सितम्बर, 2028 तक नहीं बल्कि 16 अप्रैल, 2026 को पूरा होगा।
हेमंत के मुताबिक मौजूदा समय में एचपीएससी में चेयरमैन के अलावा पांच सदस्यों के ही स्वीकृत पद है। करीब सवा दो वर्ष पूर्व दिसम्बर, 2023 में हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक पद पर कार्यरत डॉ.सोनिया त्रिखा को आयोग में बतौर सदस्य नियुक्त किया गया था। डॉ. सोनिया हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर की धर्मपत्नी हैं। वह दिसम्बर, 2023 में अपनी रिटायरमेंट से पहले ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर आयोग की सदस्य बनी थी। उनका कार्यकाल दिसम्बर, 2029 तक है।
डॉ. सोनिया से पूर्व अप्रैल 2023 में ममता यादव को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। रेवाड़ी जिले की मूल निवासी ममता ने नियुक्ति से कुछ दिन पूर्व ही समाजशास्त्र के प्रवक्ता पद से त्यागपत्र दिया था। ममता यादव का आयोग एक सदस्य के तौर पर कार्यकाल अप्रैल, 2029 तक है।
ममता से पूर्व गत् वर्ष सितम्बर, 2022 में हिसार जिले की मंडी आदमपुर से ज्योति बैंदा को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। ज्योति आयोग में सदस्य बनने से पूर्व लगातार 6 वर्षों तक हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन रही थीं। ज्योति बैंदा का एचपीएससी में सदस्य के तौर पर कार्यकाल सितम्बर, 2028 तक है।
उससे पूर्व जुलाई, 2021 में आनंद कुमार शर्मा जो पहले भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) के बतौर निदेशक के पद पर कार्यरत थे, को एचपीएससी का सदस्य नियुक्त किया गया था जिनका कार्यकाल जुलाई, 2027 तक है।
साढ़े पांच वर्ष पूर्व अक्तूबर, 2020 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के एडीसी रहे आलोक वर्मा जो सेवानिवृत्त आईएफएस (भारतीय वन सेवा) अधिकारी भी रहे हैं, को आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल पूरे छ: वर्ष तक अर्थात अक्टूबर, 2026 तक है।
हेमंत ने बताया कि कि संविधान के अनुच्छेद 316 (1) के अनुसार आयोग में कम से कम आधे सदस्य ऐसे होने चाहिए जिन्होंने नियुक्ति के पहले न्यूनतम 10 वर्षो तक केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी पद पर रह चुके हों।
चूंकि सदस्य राजेंद्र कुमार का 16 अप्रैल को कार्यकाल पूरा होने के बाद एचपीएससी में चेयरमैन सहित तीन सदस्य सरकारी सेवा पृष्ठभूमि से होंगे अर्थात वह नियुक्ति से पूर्व केंद्र या हरियाणा सरकार की सेवा में 10 वर्षों से ऊपर तक रह चुके हैं। इसलिए हेमंत का मानना है कि आयोग में नए नियुक्त होने वाला सदस्य गैर-सरकारी सेवा पृष्ठभूमि अर्थात राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि से हो सकता है। हालांकि अगर प्रदेश सरकार चाहे तो एचपीएससी विनियमों में संशोधन कर आयोग में सदस्यों के पदों को मौजूदा 5 से घटाकर 4 भी कर सकती है।





