बहुरंगी बत्ती के लिए अधिकृत वाहनों की सूची परिवहन विभाग द्वारा सार्वजनिक करने की अपील
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 2 जुलाई: देशभर में VIP कल्चर को समाप्त करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मई, 2017 में सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं की गाडिय़ों पर से वीआईपी लालबत्ती और सायरन/हूटर हटाने का फैसला किया गया था।
केंद्र सरकार द्वारा 1 मई, 2017 को जारी अधिसूचना के बावजूद हरियाणा में ज्यादातर सरकारी और प्राईवेट वाहनों पर आज भी लाल-नीली-सफेद मल्टीकलर वाली बत्तियां लगी दिखाई देती हैं। ऐसे लोगों में सांसद, MLA, निगम पार्षद, भाजपा के छोटे-बड़े नेताओं सहित छुटभयै लोग भी शामिल हैं। इनकी सरकारी और प्राईवेट गाडिय़ों में लगी लाल-नीली-सफेद मल्टीकलर वाली बत्तियां और सडक़ों पर सरेआम बजते सायरन/हूटर मोदी सरकार के फैसले की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं, जबकि इनके उपयोग की अनुमति केवल आपदा प्रबंधन, अग्निशमन, पुलिस, रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों से जुड़े विशेष आपातकालीन कार्यों तक ही सीमित है। यही कारण है कि वीआईपी संस्कृति समाप्त करने के ऐतिहासिक फैसले के नौ वर्ष बाद एक बार फिर इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।
अगर बात फरीदाबाद जिले से ही शुरू करें तो यहां भी यही आलम है। सडक़ पर आपको हर पांच-सात मिनट में लाल-नीली-सफेद मल्टीकलर वाली बत्तियां लगी और उसमें सरेआम बजते सायरन/हूटर दिखाई दे जाएंगे। शायद यही कारण रहा कि पिछले दिनों शहर के एक जागरूक नागरिक जितेन्द्र ने अपने ‘एक्स’ पर दो अलग गाडिय़ों की विडियो पोस्ट की जिसमें लाल-नीली बत्ती और हूटर बजता हुआ दिखाई दिया। इनमें से एक गाड़ी नगर निगम कमिश्रर की थी तो दूसरी गाड़ी बल्लभगढ़ के ज्वाईंट कमिश्रर की थी। ये विडियो ‘एक्स’ पर पोस्ट करने के बाद भी जब प्रशासन ने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की तो जितेन्द्र ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय यानि पीएमओ के पोर्टल सेंट्रल पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेसल एंड मॉनिटरिंग सिस्टम में कर दी। इसके बाद पीएमओ ऑफिस के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन हरकत में आया तो उक्त दोनों अधिकारियों को अपनी-अपनी गाड़ी से लाल-नीली बत्ती हटाकर उसकी विडियो बना उसे उसी पोर्टल पर अपलोड करना पड़ा, जब जाकर मामला खत्म हुआ।
हालांकि इस घटना से भी सरकारी अधिकारियों और छोटे-बड़े नेताओं ने भी सबक नहीं लिया। इसका जीता-जागता प्रमाण है कि आज भी डीसी ऑफिस, नगर निगम कार्यालय, एचएसवीपी ऑफिस आदि किसी भी सरकारी बिल्डिंग में चले जाओ, वहां आपको लाल-नीली बत्ती लगी गाडिय़ां खड़ी हुई नजर आ जाएंगी, जोकि मोदी सरकार की अधिसूचना का खुला उल्लंघन है।
9 वर्षों में एक बार भी नहीं जारी हुई सार्वजनिक सूची?:-
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस मामले में अपने अभ्यावेदन/पत्र में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठाया है कि केंद्रीय सरकार की अधिसूचना के अनुसार राज्य परिवहन विभाग को प्रत्येक वर्ष उन सभी अधिकृत वाहनों एवं अधिकारियों की सूची सार्वजनिक करनी होती है, जिन्हें ऐसी बत्तियों के उपयोग की अनुमति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि उनकी जानकारी के अनुसार हरियाणा परिवहन विभाग ने पिछले नौ वर्षों में ऐसी कोई वार्षिक सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की है। यदि जारी की गई है तो उसे आम जनता की पहुंच में उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया।
जिला उपायुक्तों सहित कई अधिकारियों के वाहनों पर सवाल:-
अभ्यावेदन में लिखा गया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कमिश्नरों (डीसी) तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों पर भी ऐसी बहुरंगी बत्तियां लगी देखी जाती हैं। केवल मजिस्ट्रेटी शक्तियां होने मात्र से किसी अधिकारी को इन बत्तियों के उपयोग का वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता क्योंकि केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
पूरे प्रदेश में सत्यापन अभियान चलाने की अपील:-
अधिवक्ता हेमंत ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि अधिकृत वाहनों की वार्षिक सार्वजनिक सूची तत्काल जारी की जाए। सूची को सरकारी वेबसाइटों और समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए। पूरे हरियाणा में विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए। अनधिकृत वाहनों से मल्टीकलर लाल-नीली-सफेद बत्तियां तुरंत हटाई जाएं। नियमों के उल्लंघन और अधिसूचना के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरूद्व कार्रवाई की जाए।
कानून से ऊपर कोई नहीं:-
यह मामला केवल वाहनों पर लगी बत्तियों का नहीं, बल्कि संवैधानिक शासन, प्रशासनिक पारदर्शिता, कानून के समक्ष समानता और केंद्र सरकार के कानूनों के ईमानदार क्रियान्वयन का है। वर्ष 2017 में वीआईपी लालबत्ती संस्कृति समाप्त करने का उद्देश्य यही था कि लोकतंत्र में कोई भी सार्वजनिक पदाधिकारी स्वयं को आम नागरिकों से ऊपर न समझे। ऐसे में नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार की विशेष पहचान या विशेषाधिकार की अनुमति लोकतांत्रिक भावना के विपरीत होगी।
बड़ी जांच की मांग से प्रशासन में हलचल:-
इस कानूनी अभ्यावेदन/पत्र के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या हरियाणा में मल्टीकलर लाल-नीली-सफेद बत्तियों के उपयोग संबंधी केंद्रीय नियमों का पूरी तरह पालन हो रहा है और क्या परिवहन विभाग ने अधिसूचना के तहत अपनी वैधानिक जिम्मेदारियां निभाई हैं? यदि नहीं, तो आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, हरियाणा के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तृत कानूनी अभ्यावेदन भेजकर हरियाणा में जिलों के उपायुक्त, उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों पर मल्टीकलर बहुरंगी (लाल-नीली-सफेद) बत्तियों के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।





