प्रोसेसिंग के मौजूदा रेट में 20 से 30 प्रतिशत संशोधन पर सहमति, 35 से अधिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने की चर्चा
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट
Faridabad, 20 सितंबर: दिल्ली-एनसीआर के टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एवं डाइंग उद्योग में लगातार बढ़ रही उत्पादन लागत के बीच प्रोसेसिंग रेट में 20 से 30 प्रतिशत तक संशोधन करने पर उद्योग प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी है। इस संबंध में शनिवार शाम द ललित होटल में टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन ऑफ हरियाणा (TAAH) और दिल्ली-एनसीआर टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में दिल्ली-एनसीआर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की 35 से अधिक टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एवं डाइंग इकाइयों के उद्योगपति और प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस दौरान बढ़ती उत्पादन लागत, बाजार की स्थिति और प्रोसेसिंग इकाइयों की आर्थिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
डाई-केमिकल से लेकर ऊर्जा और मजदूरी तक बढ़ी लागत:-
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि डाई एवं केमिकल, कच्चे माल, पेट्रोलियम उत्पादों, ऊर्जा, परिवहन, श्रम, वेतन और पीएफ समेत लगभग सभी प्रमुख मदों में लागत बढ़ी है, जबकि प्रोसेसिंग एवं डाइंग के मौजूदा रेट में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ है। इससे इकाइयों पर लगातार आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

TAAH के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति संबंधी व्यवधान, कच्चे माल की उपलब्धता में अनिश्चितता और औद्योगिक इनपुट की बढ़ती कीमतों का सीधा असर प्रोसेसिंग उद्योग पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ी लागत के अनुरूप व्यावहारिक रेट संशोधन उद्योग को टिकाऊ तरीके से चलाने के लिए जरूरी है।
100 कर्मचारियों वाली इकाई पर 5-6 लाख रुपये का अतिरिक्त भार:-
बैठक में हरियाणा में न्यूनतम वेतन में वृद्धि और PF से संबंधित बढ़ी लागत का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार करीब 100 कर्मचारियों वाली एक इकाई पर इन मदों में औसतन 5 से 6 लाख रुपये तक का अतिरिक्त वार्षिक लागत भार पड़ रहा है। इसके अलावा ऊर्जा, डाई-केमिकल, परिवहन और अन्य परिचालन खर्चों में वृद्धि से लागत और बढ़ गई है।

दिल्ली-एनसीआर टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एस.डी. खेत्रपाल ने कहा कि पुराने रेट पर लगातार काम करना मौजूदा परिस्थितियों में चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेट संशोधन का उद्देश्य ग्राहकों, एक्सपोर्टरों या खरीदारों पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि बढ़ी हुई लागत और प्रोसेसिंग रेट के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने ग्राहकों और एक्सपोर्टरों को महत्वपूर्ण कारोबारी साझेदार बताया।
कुशल श्रमिकों की कमी भी बनी चुनौती
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने कुशल श्रमिकों की कमी, बढ़ती मजदूरी, ऊर्जा लागत, डाई-केमिकल की कीमतों और अन्य परिचालन खर्चों को भी बड़ी चुनौती बताया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि उत्पादन लागत और प्रोसेसिंग रेट के बीच संतुलन नहीं बना तो इसका असर उद्योग की आर्थिक स्थिरता और रोजगार पर पड़ सकता है।
लागत कम हुई तो रेट घटाने पर भी होगा विचार:-
उद्योग प्रतिनिधियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित रेट संशोधन को केवल एकतरफा बढ़ोतरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि भविष्य में कच्चे माल, डाई-केमिकल, ऊर्जा अथवा अन्य प्रमुख इनपुट की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आती है तो परिस्थितियों के अनुसार प्रोसेसिंग एवं डाइंग रेट में कमी करने पर भी विचार किया जाएगा।
बैठक में अनिल जैन, अरुण जैन, किशन कुमार, रौनक खेत्रपाल, सौरव खेत्रपाल, नवीश खेत्रपाल, गिरीश वासन, अविनाश/अजय जैन, किशन जैन, जी.बी. प्रसाद, श्रेय गिरोत्रा, मोहित हिमांशु, शक्ति सचदेव, गौरव आहूजा, जे.एन. रस्तोगी, संजीव/सोनू जैन, रविंद्र पाल, आर.पी. शर्मा, संजीव त्यागी, एम.पी. शर्मा, राजीव रस्तोगी, अनूप अरोड़ा और आदित्य सहित विभिन्न टेक्सटाइल, डाइंग एवं प्रोसेसिंग इकाइयों से जुड़े उद्योगपति एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।





