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इनेलो नेता मनोज गोयल ने गंदे नाले की सफाई को लेकर निगम प्रशासन पर आरोप जड़े

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
बल्लभगढ़, 30 दिसम्बर: नगर निगम में अब नालों की सफाई के नाम पर जमकर घोटाला हो रहा है। निगम प्रशासन नाले की सफाई के लिए साल में दो बार टेंडर तो छोड़ता है लेकिन सफाई कागजों/फाईलों में हो जाती है और सरकाररी रकम को निगम पार्षद, संबंधित अधिकारीगण व ठेकेदार बंदरबांट कर स्वयं ही खा जाते हैं। यह कहना है इनेलो नेता मनोज गोयल का।
ऐसा ही एक मामला यहां नगर निगम के वार्ड नंबर-38 के अंर्तगत मुकेश कालोनी देखने को मिल रहा है जहां नगर निगम ने सिटी पार्क के साथ लगते गंदे नाले की सफाई के लिए 14 जून, 2017 को 12 लाख, 79 हजार, 600 रुपये का ठेका छोड़ दिया और 14 जुलाई तक सफाई करने का समय दिया है, लेकिन सफाई आज तक नहीं हुई। इसके चलते लोगों में गंदे नाले की सफाई ना करने को लेकर रोष बना हुआ है।
इनेलो नेता मनोज गोयल ने इस मामले में स्थानीय निगम पार्षद हरप्रसाद गौड़ पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने एक नजदीकी को गंदे नाले की सफाई का ठेका दिलवाया हुआ है लेकिन सफाई आज तक नही हुई।
गंदे नाले की सफाई कराने को लेकर लोगों ने शुक्रवार को नगर निगम संयुक्त आयुक्त अमरदीप जैन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से कृष्णकुमार गोयल, इनेलो नेता मनोज गोयल और उनके साथी शामिल थे। बकौल गोयल उन्हें संयुक्त आयुक्त अमरदीप जैन ने आश्वासन दिया था कि वो स्वयं मौका देखने आएंगे लेकिन वे नहीं आए।
कृष्ण कुमार गोयल ने बताया कि नाले की सफाई को लेकर कुछ समय पहले उन्होंने नगर निगम में आरटीआई लगाकर जानकारी मांगी थी। आइटीआई के जवाब में निगम ने बताया कि नाले की सफाई के लिए 14 जून, 2017 को 12 लाख, 79 हजार, 600 रुपये का ठेका छोड़ दिया है और 14 जुलाई तक सफाई करने का समय दिया है। इसके बाद भी सफाई न होने के बाद 13 दिसंबर को फिर से आरटीआइ लगाई, जिसके जवाब में बताया गया कि ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है, लेकिन ठेके के पैसों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
वहीं मनोज गोयल ने बताया कि नाले के कारण गंदगी बढ़ रही है। बीमारी फैलने के डर से लोगों में रोष है। यदि जल्दी ही नाले की सफाई नहीं की तो लोगों द्वारा नगर निगम पर प्रदर्शन किया जाएगा।
मनोज गोयल का यह भी कहना था कि उन्हें बताया गया कि नाले का मलबा पीछे से निकाला गया है जोकि 135 ट्रॉली था, लेकिन वो मलबा कैसे, कब और किसने किसके द्वारा निकालकर कहां ले जाया गया इसका जवाब किसी के पास नहीं था।

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