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सूरजकुंड मेले में भारत की संस्कृति, शिल्प कला, भारतीय विरासत की शानदार झलक देखने को मिलती है: सुमिता मिश्रा

नवीन गुप्ता
चण्डीगढ़: हरियाणा पर्यटन द्वारा 29वें सूरजकुंड अंतर्राष्टï्रीय शिल्प मेले का आयोजन पहली से 15 फरवरी, 2015 तक सूरजकुंड, फरीदाबाद में किया जायेगा और इस वर्ष इस मेले का थीम राज्य छत्तीसगढ़ होगा। हरियाणा पर्यटन निगम की प्रबंध निदेशक श्रीमती सुमिता मिश्रा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सूरजकुंड शिल्प मेले का आयोजन हरियाणा पर्यटन निगम एवं सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा केन्द्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति एवं विदेश मंत्रालयों के सहयोग से किया जायेगा।
श्रीमती मिश्रा ने कहा कि भारतीय पर्यटन के क्षेत्र में इस मेले का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है, जहां मेले में भारत की संस्कृति, शिल्प कला, परम्परा तथा भारतीय विरासत की शानदार झलक देखने को मिलती है, वहीं इस मेले ने भारतीय कला, शिल्प और सांस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि दर्शक एवं पर्यटक इस मेले का बड़ी बेसब्री से इंतजार करते हैं और यह मेला हर वर्ष लाखों घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
श्रीमती मिश्रा ने कहा कि इस मेले की एक विशिष्टïता यह भी है कि हर वर्ष भारतीय संघ के एक राज्य को मेले का थीम राज्य बनने का अवसर मिलता है और इस वर्ष छत्तीसगढ़ थीम राज्य है। भारत के विभिन्न राज्यों की हथकरघा, हस्तशिल्प, लोक कलाओं, व्यंजनों तथा उसकी पर्यटन क्षमता को उजागर करने एवं बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही हर वर्ष एक राज्य को थीम राज्य बनाया जाता है। इस वर्ष मेले में छत्तीसगढ़ अपनी कबीलाई विरासत एवं संस्कृति को प्रस्तुत करेगा जोकि बस्तर के जंगलों में अब भी सुरक्षित पायी जाती है। मेले में छत्तीसगढ़ राज्य के कुशल शिल्पकार, प्रतिभावान कलाकार और मास्टर शेफ भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त, मेला मैदान में राज्य के ग्रामीण परिवेश को प्रस्तुत करने वाला माहौल भी सृजित किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि समय गुजरने के साथ मेले का महत्व बढ़ा है और वर्ष 2013 में इसे अंतर्राष्टï्रीय मेले का दर्जा दिया गया। अब यह मेला बढ़ी संख्या में विदेशी भागीदारी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मेले के लिए हर वर्ष एक देश का चयन भागीदार राष्ट्र के रूप में किया जाता है और वह देश 15 दिन चलने वाले इस मेले में अपनी श्रेष्ठï कलाओं, संस्कृति, परम्पराओं एवं विरासत को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करता है।
श्रीमती मिश्रा ने कहा कि 29वें सूरजकुंड अंतर्राष्टï्रीय शिल्प मेला-2015 के लिए लैबनॉन भागीदार राष्टï्र होगा। इस भूमध्यीय राष्टï्र के शिल्पकार, सांस्कृतिक समूह तथा मास्टर शेफस इस मेले में दर्शकों को भाव विभोर करने के लिए अपनी कला एवं प्रतिभा प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 20 देश सूरजकुंड अंतर्राष्टï्रीय शिल्प मेला, 2015 में भाग लेने की पहले ही सहमति दे चुके हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में पहली बार मिस्र सूरजकुंड शिल्प मेले का फोकस राष्टï्र बना और तब से किसी एक देश या राष्टï्र को मेले का भागीदार राष्टï्र बनाना शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि 26वें सूरजकुंड शिल्प मेला, 2012 के दौरान पहली बार थाईलैंड को मेले के भागीदार राष्टï्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात् 27वें सूरजकुंड अंतर्राष्टï्रीय शिल्प मेला, 2013 में अफ्रीकी राष्टï्रों ने भागीदार राष्टï्रों के रूप में भागीदारी की और 28वें सूरजकुंड अंतर्राष्टï्रीय शिल्प मेला, 2014 के लिए श्रीलंका का चयन भागीदार राष्टï्र के रूप में किया गया। उन्होंने कहा कि थीम राज्य एवं भागीदार राष्टï्र सूरजकुंड शिल्प मेले को एक विशिष्टïता प्रदान करते हैं तथा यह मेला भारतीय संस्कृति और विभिन्न राष्टï्रों के संगम का आधार बनता है। download

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