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सूरजकुंड मेला लोकल टू ग्लोबल आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम पर आयोजित किया जाएगा: DC आयुष सिन्हा

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।

Faridabad News, 27 जनवरी: जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा ने बताया कि हरियाणा पर्यटन एवं सूरजकुंड मेला प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित होने वाला 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल-2026 इस वर्ष नई पहचान के साथ लोकल टू ग्लोबल आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम पर आयोजित किया जाएगा। यह भव्य आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी तक सूरजकुंड मेला परिसर में संपन्न होगा।

DC आयुष सिन्हा ने बताया कि देश के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हरियाणा नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री मनोहर लाल सहित हरियाणा सरकार के मंत्रीगण एवं विधायक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट मेले में इस साल मेघालय और उत्तर प्रदेश को थीम स्टेट चुना गया है, जबकि मिस्र को पार्टनर कंट्री घोषित किया गया है। मेले में पार्टनर नेशन एवं थीम स्टेट्स के विशेष फूड स्टॉल, हस्तशिल्प एवं हस्तकरघा उत्पादों की बिक्री तथा दैनिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। बच्चों के लिए स्कूल प्रतियोगिताएं, झूले, अम्यूजमेंट जोन, अपना घर हरियाणा तथा पारंपरिक ग्रामीण जीवन की झलक भी विशेष आकर्षण होंगी। उन्होंने बताया कि उत्कृष्ट शिल्पकारों को कला रत्न, परमपरागत, कला मणि, कला निधि एवं कला पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा।

1987 से शुरू हुआ सूरजकुंड मेला, आज अंतरराष्ट्रीय पहचान का प्रतीक:- मेला प्रशासक एवं एडीसी सतबीर मान ने बताया कि हर वर्ष फरवरी माह में आयोजित होने वाला यह मेला भारत की लोक कला, शिल्प, हस्तकरघा, लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक प्रचार का एक प्रमुख मंच है। ग्रामीण भारत की आत्मा को दर्शाने वाले विशेष परिवेश में आयोजित यह मेला हरियाणा पर्यटन का एक हस्ताक्षर कैलेंडर इवेंट है। जिसे भारत सरकार के पर्यटन, वस्त्र, संस्कृति, विदेश मंत्रालय तथा आईसीसीआर के सहयोग से आयोजित किया जाता है। इस मेले की शुरूआत वर्ष 1987 में तत्कालीन सचिव पर्यटन, भारत सरकार एस.के. मिश्रा एवं तत्कालीन सचिव पर्यटन, हरियाणा एस.के. शर्मा की परिकल्पना से हुई थी। इसका उद्वेश्य लुप्तप्राय भारतीय कला एवं शिल्प को संरक्षण प्रदान करना था। वर्षों के दौरान यह मेला शिल्पकारों को बिचौलियों के बिना सीधे खरीदारों से जोडऩे का सशक्त मंच बन चुका है।

वर्ष 2013 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेले को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत किया गया और इसका नाम सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला रखा गया। वर्ष-2025 के 38वें संस्करण में 44 से अधिक देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 15 लाख से अधिक पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया। इस वैश्विक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2026 के 39वें संस्करण में मेले का नाम बदलकर सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत की भावना, शिल्पकारों के सशक्तिकरण एवं पारंपरिक कला के वैश्विक प्रदर्शन को प्रतिबिंबित करता है। 42.5 एकड़ में फैले मेला परिसर में 1000 से अधिक स्टॉल, शिल्प कार्यशालाएं, लाइव डेमोंस्ट्रेशन, विरासत कला खंड, मनोरंजन क्षेत्र एवं फूड कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। वर्ष 2025 में 1188 शिल्पकारों ने भाग लिया था। दो प्रमुख चौपालों पर निरंतर लोक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों का मन मोहेंगी। भव्य सांस्कृतिक कार्निवाल, फैशन शो, संगीत, नाट्य एवं अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी।

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