प्रदेश भाजपा द्वारा पार्टी प्रत्याशियों की घोषणा सम्बन्धी जारी प्रेस विज्ञप्तियों में पार्षद शब्द के प्रयोग विरूद्व एडवोकेट ने भेजा ज्ञापन
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 24 अप्रैल: हरियाणा में आगामी नगर निकाय चुनाव-2026 से पहले प्रदेश के म्युनिसिपल कानूनों में प्रयुक्त शब्दावली को लेकर नया विवाद सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एडवोकेट एवं प्रदेश के अम्बाला नगर निगम के मूल निवासी एवं मतदाता हेमंत कुमार ने हरियाणा भाजपा द्वारा गुरूवार, 23 अप्रैल को जारी विभिन्न प्रेस विज्ञप्तियों में विभिन्न नगर निकायों में वार्ड स्तर के पार्टी प्रत्याशियों का ‘पार्षद’ के तौर पर उल्लेख किये जाने पर लिखित ऐतराज दर्ज कराया है।
एडवोकेट हेमंत ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, हरियाणा प्रभारी डॉ. सतीश पूनिया, सह-प्रभारी सुरेन्द्र सिंह नागर, प्रदेश अध्यक्ष पं. मोहनलाल बड़ौली और प्रदेश महामंत्री सुरेन्द्र पूनिया को भेजे ज्ञापन में स्पष्ट किया कि यह शब्दावली हरियाणा के मौजूदा म्युनिसिपल कानूनों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने लिखकर स्पष्ट किया है कि हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 और हरियाणा नगर निगम अधिनियम-1994 सहित इनके अंतर्गत बने निर्वाचन नियमों में कहीं भी ‘पार्षद’ शब्द का उल्लेख नहीं है। इसके विपरीत इन सभी कानूनों में नगर निकायों के वार्डों से निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए केवल ‘सदस्य’ शब्द का ही प्रयोग किया गया है।
हेमंत के अनुसार, यह भले ही आम बोलचाल में प्रचलित हो लेकिन कानूनी और आधिकारिक दृष्टि से हरियाणा में किसी भी नगर निकाय में ‘पार्षद’ नाम का कोई पद अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के सभी 87 शहरी निकायों-11 नगर निगम, 25 नगर परिषद और 51 नगरपालिका समितियों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को केवल ‘सदस्य’ ही माना जाता है।
उन्होंने हाल ही में हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 13 अप्रैल को घोषित उप-चुनावों का उदाहरण देते हुए बताया कि आयोग की चुनाव घोषणा सम्बन्धी जारी अधिसूचना गत 21 अप्रैल से आगामी 25 अप्रैल तक नगर निकाय के वार्डो से चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों द्वारा भरे जा रहे नामांकन फॉर्म, मतगणना के बाद विजयी और निर्वाचित घोषित उम्मीदवारों को रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा प्रदान किये जाने वाले चुनाव प्रमाण-पत्रों और निर्वाचित वार्ड प्रतिनिधियों के लिए सरकारी गजट में भी ‘सदस्य’ शब्द का ही उपयोग किया गया है न कि ‘पार्षद’ शब्द का।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि नगर निकाय के वार्डों से निर्वाचित प्रतिनिधियों की गजट नोटिफिकेशन के बाद होने वाली शपथ ग्रहण प्रक्रिया में भी निर्वाचित प्रतिनिधियों को ‘सदस्य’ के रूप में ही पद और निष्ठा की शपथ दिलाई जाती है न कि ‘पार्षद’ के रूप में।
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि देश के अन्य राज्यों-जैसे पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश आदि में ‘पार्षद’ शब्द का प्रयोग कानूनी रूप से मान्य है क्योंकि वहां के संबंधित कानूनों में इसका प्रावधान है। लेकिन हरियाणा में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होने के कारण इसका उपयोग ‘कानूनन गलत’ बताया गया है।
अंत में अधिवक्ता हेमंत ने हरियाणा भाजपा से अपील की है कि वह अपनी प्रेस विज्ञप्तियों में सुधार करते हुए ‘पार्षद प्रत्याशी’ की जगह वार्ड सदस्य प्रत्याशी शब्द का प्रयोग करे ताकि यह हरियाणा राज्य के प्रचलित कानूनों के अनुरूप हो।
इस मुद्दे के उठने के बाद नगर निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना है।





