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नर्सों के विरोध के बीच नया विवाद: रेणु भाटिया का कार्यकाल कानूनन वैध या नहीं?

3 साल की सीमा के बाद भी पद पर रेणु भाटिया, कार्यकाल की वैधता पर छिड़ी बहस

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।

Chandigarh, 9 जून: कुरूक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश नागरिक अस्पताल में एक नाबालिग से कथित दुष्कर्म के प्रकरण के निरीक्षण के दौरान की गई टिप्पणी को लेकर सरकारी नर्सिंग स्टाफ के विरोध का सामना झेल रहीं हरियाणा राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया के कार्यकाल की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और कानूनी मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 के मौजूदा प्रावधान के अंतर्गत रेणु भाटिया का राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन के तौर पर कार्यकाल कानूनन गत वर्ष जनवरी 2025 में ही पूरा हो गया था।

हाल ही में कुरूक्षेत्र सिविल अस्पताल के निरीक्षण के दौरान नर्सिंग स्टॉफ की कथित लापरवाही संबंधी टिप्पणी के बाद राज्यभर के नर्सिंग कर्मचारियों में रोष फैल गया। कुरूक्षेत्र में नर्सों ने दो घंटे की हड़ताल कर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि हरियाणा नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रदेशव्यापी दो घंटे पेन-डाउन स्ट्राइक का आह्वान किया। वहीं ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखकर रेणु भाटिया को पद से हटाने की मांग की है।

18 जनवरी 2025 को पूरा हो चुका था कार्यकाल:- हेमंत

एडवोकेट हेमंत कुमार के अनुसार रेणु भाटिया ने 19 जनवरी 2022 को महिला आयोग की चेयरपर्सन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया था। हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 4(1) में स्पष्ट प्रावधान है कि आयोग की चेयरपर्सन वाइस-चेयरपर्सन तथा सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष से अधिक नहीं हो सकता। इस आधार पर उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2025 को पूरा हो गया था।

हेमंत का कहना है कि हालांकि उससे करीब दो महीने पूर्व 26 नवंबर 2024 को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी एक पत्र के माध्यम से रेणु भाटिया का कार्यकाल अगले आदेशों तक बढ़ा दिया गया था, किंतु किसी विभागीय पत्र द्वारा कानून में निर्धारित अधिकतम कार्यकाल की सीमा को पार नहीं किया जा सकता। इसके लिए अधिनियम/कानून में विधिवत संशोधन आवश्यक है।

उन्होंने यह भी बताया कि बेशक इसी कानून की धारा 4 (2) में उल्लेख है कि आयोग के चेयरपर्सन, वाइस-चेयरपर्सन एवं सदस्य 65 वर्ष आयु पूरा करने के बाद पद पर नही रह सकेंगे परन्तु इससे ठीक पूर्व धारा 4 (1) में अधिकतम तीन वर्ष की समय सीमा का स्पष्ट उल्लेख होने के कारण ऐसा नहीं कहा जा सकता कि तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी चेयरपर्सन वाइस-चेयरपर्सन एवं सदस्य 65 वर्ष आयु पूरी करने तक पद पर आसीन रहेंगे।

हाईकोर्ट के फैसले का हवाला:-

हेमंत कुमार ने मई 2016 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए एक निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत ने धारा 4 (1) की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार महिला आयोग की चेयरपर्सन और वाइस-चेयरपर्सन की नियुक्ति अधिकतम तीन वर्ष के लिए ही कर सकती है।

यह निर्णय तत्कालीन चेयरपर्सन कमलेश पंचाल तथा वाइस-चेयरपर्सन सुमन दहिया द्वारा दायर याचिकाओं से संबंधित था।

डेढ़ वर्ष से अधिक समय से लंबित है कानूनी स्पष्टता:-

हेमंत कुमार ने दावा किया कि वह पिछले डेढ़ वर्ष से इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल आशिम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी, विभाग के प्रशासनिक सचिव और महानिदेशक एवं अन्य आला अधिकारियों, एडवोकेट जनरल (एजी) विधि परामर्शी (एलआर) तथा रेणु भाटिया तक को लिख चुके हैं। उन्होंने हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 की धारा 4 (1) में तत्काल संशोधन की सार्वजनिक अपील की ताकि तीन वर्ष तक आयोग की चेयरपर्सन का कार्यकाल पूरा करने के बावजूद पद पर कार्यरत भाटिया को उसके बाद के कार्यकाल के लिए आवश्यक वैधानिक कानूनी मान्यता प्राप्त हो सके।

आयोग में सदस्य नहीं, केवल चेयरपर्सन:- हेमंत कुमार ने यह भी दावा किया कि हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 के अनुसार आयोग में एक वाइस-चेयरपर्सन तथा अधिकतम पांच सदस्य नियुक्त किए जा सकते हैं, जिनमें से कम से कम एक सदस्य अनुसूचित जाति (एस.सी.) वर्ग से होना चाहिए।

हालांकि रेणु भाटिया के पूरे कार्यकाल में आयोग में एक भी सदस्य नियुक्त नहीं किया गया। हालंकि, मार्च 2024 में सोनिया अग्रवाल को वाइस-चेयरपर्सन बनाया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार के एक कथित मामले में गिरफ्तारी के बाद जनवरी 2025 में उन्हें समयपूर्व पद से हटा दिया गया। तब से आयोग में न तो वाइस-चेयरपर्सन है और न ही कोई सदस्य।

बड़ा सवाल:-

राज्यभर में नर्सिंग स्टॉफ के विरोध और महिला आयोग की सक्रियता को लेकर जारी बहस के बीच अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि कानून तीन वर्ष से अधिक कार्यकाल की अनुमति नहीं देता, तो क्या रेणु भाटिया का 18 जनवरी 2025 के बाद का कार्यकाल पूर्णत: वैध माना जा सकता है, या फिर सरकार को पहले अधिनियम में संशोधन कर कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यही सवाल अब प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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