विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है: कृष्णपाल गुर्जर
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Faridabad, 14 अगस्त: सैक्टर-12 स्थित सभागार कक्ष में जिला स्तरीय विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल इतिहास की एक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्हें देश विभाजन के दौरान अपना घर, परिवार और जीवन तक गंवाना पड़ा। केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। उनके साथ फरीदाबाद जिलाध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल, बल्लभगढ़ जिलाध्यक्ष सोहन पाल जिला उपायुक्त आयुष सिन्हा, सीईओ जिला परिषद शिखा भी मौजूद रही।
कार्यक्रम की शुरूआत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर सूचना, जनसंपर्क एव भाषा विभाग द्वारा लगाई गयी प्रदर्शनी का अवलोकन से हुई। इसके पश्चात विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के पीडि़तों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी और साथ ही उनकी याद में दो मिंट का मोन रखा गया। कार्यक्रम में विभाजन की त्रासदी झेल चुके कैप्टन तुसलीदास, द्वारिका नाथ कथूरिया और प्रकाश लाल शर्मा ने अपने अनुभवों को साझा किया।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि 14 अगस्त 1947 की तारीख भारत के इतिहास का ऐसा क्षण है, जब एक ओर देश 200 वर्षों की गुलामी से स्वतंत्र होने जा रहा था, वहीं दूसरी ओर विभाजन की त्रासदी ने करोड़ों लोगों को गहरे दु:ख और विस्थापन का सामना करने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को स्वयं झेलने वाले वरिष्ठ नागरिकों और समाज के उन प्रतिष्ठित लोगों का विशेष उल्लेख किया। जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन पुन: स्थापित किया और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कहा कि सिंध और अन्य क्षेत्रों से विस्थापित होकर आए लोगों ने विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, परिश्रम और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके संघर्ष से नई पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 से 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का जो निर्णय लिया, वह उन असंख्य पीडि़त परिवारों के प्रति राष्ट्र की संवेदनशील श्रद्धांजलि है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश का उल्लेख किया कि देश के बंटवारे का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता और नफरत व हिंसा के कारण लोगों को विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास केवल पढऩे का विषय नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने का माध्यम है। विभाजन की त्रासदी हमें राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक अखंडता के महत्व का स्मरण कराती है। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, बलिदान और संघर्ष को समझे तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प ले।
इस अवसर पर कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पूरा देश एकजुट होकर विदेशी शासन के विरूद्ध लड़ा था। इसलिए हमें ऐसी किसी भी विभाजनकारी सोच से सावधान रहना होगा, जो समाज में वैमनस्य पैदा करे। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत में निहित है। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका में जान गंवाने वाले सभी लोगों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि उनके संघर्ष और बलिदान को राष्ट्र सदैव स्मरण रखेगा। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा आयोजित गरिमामय कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इतिहास से जोडऩे और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी उपस्थित नागरिकों से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और भारत माता की सेवा के लिए समर्पित रहने का आह्वान किया।
इस मौके पर जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल ने कहा कि 14 अगस्त केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के दर्द, संघर्ष और पुनर्निर्माण की स्मृति का दिन है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने घर, परिवार और जड़ों को खो दिया। उन्होंने कहा कि आजादी का सूर्योदय जितना गौरवपूर्ण था, उससे पहले की रात उतनी ही भयावह और पीड़ादायक थी। विभाजन का दर्द आज भी अनेक परिवारों की स्मृतियों में जीवित है और उनके अपने परिवार ने भी सियालकोट से भारत आते समय अपनों को खोने का दु:ख झेला। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए और फरीदाबाद उन प्रमुख स्थानों में रहा, जहां बड़ी संख्या में विस्थापित परिवारों को बसाया गया। इन परिवारों ने कठिन परिस्थितियों में अपने श्रम, साहस और संकल्प से जीवन को पुन: स्थापित किया तथा व्यापार, उद्योग, शिक्षा और सामाजिक विकास के माध्यम से आधुनिक फरीदाबाद के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने युवाओं से अपने पूर्वजों के संघर्ष को जानने और यह समझने का आह्वान किया कि आज की सुविधाएं असंख्य लोगों के त्याग और बलिदान का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की जिम्मेदारी इतिहास से प्रेरणा लेकर विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देना है। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक अखंडता को सुदृढ़ करने का संदेश देता है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के जिला स्तरीय समारोह में बल्लभगढ़ जिला अध्यक्ष सोहनपाल सिंह ने कहा कि यह दिन उत्सव का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने देश विभाजन के दौरान अमानवीय परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका का अर्थ केवल भौगोलिक बंटवारा नहीं, बल्कि भय, आतंक, विस्थापन और असंख्य परिवारों के टूटने की त्रासदी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अनेक पुस्तकें लिखी गईं, फिल्में और वृत्तचित्र बनाए गए, लेकिन जिन्होंने उस दौर को स्वयं जिया है, उनके अनुभव आज भी दिल को झकझोर देते हैं। समारोह में उपस्थित विभाजन के प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उनके साहस, संघर्ष और पुनर्निर्माण की भावना नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी युवाओं के कंधों पर है। उन्हें राष्ट्र की एकता, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे को मजबूत बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम से प्रेरणा लेकर सभी नागरिक देश को एकजुट, सशक्त और सौहार्दपूर्ण बनाए रखने के लिए कार्य करेंगे।
इस अवसर पर सीएमओ जयंत आहूजा, डीआईपीआरओ मूर्ति दलाल, डीईओ विपिन गोयल, बीडीपीओ अंशु डागर, बीडीपीओ आरती सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्तिगण और विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं मौजूद रही।







