Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट
Faridabad, 2 अक्टूबर: नगर निगम, पॉल्यूशन बोर्ड, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग पर NIT स्थित ‘वेदांता हॉस्पिटल’ के खिलाफ कार्यवाही ना करने को लेकर तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं।
मजेदार बात तो यह है कि नगर निगम कमिश्वर खुद कह चुके हैं कि ‘वेदांता हॉस्पिटल’ का ना तो नगर निगम से हॉस्पिटल का चेंज ऑफ लेंड यूज यानि CLU है और ना ही नक्शा पास है, इसलिए अवैध-गैर-कानूनी रूप से चल रहेे इस ‘वेदांता हॉस्पिटल’ पर कार्यवाही करने के लिए उन्होंने इंफोर्समेंंट विंग/तोडफ़ोड़ विभाग को निर्देश दे दिए हैं।
बावजूद इसके जिस प्रकार से नगर निगम MCF ने निगमायुक्त के उक्त निर्देशों के बाद भी करीब दो महीने बीत जाने पर कोई कार्यवाही नहीं की है, उससे नगर निगम के तोडफ़ोड़ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
वैसे तो नगर निगम का तोडफ़ोड़ विभाग अतिक्रमण/कब्जे हटाने के नाम पर गरीबों की रेहडिय़ों को निशाना बना उन पर JCB का पीला पंजा तक चलाने से गुरेज नहीं करता, वहीं सफेदपोश धनाढय़ लोगों की अवैध रूप से बनी बिल्डिंगें इन्हें नजर नहीं आती या फिर उनके दिए नोटों की चकाचौंध के कारण नहीं दिखती। इस
वहीं दूसरी तरफ पॉल्यूशन बोर्ड द्वारा भी इस संबंध में कोई कार्यवाही अमल में नहीं लाई जा रही है जिसने कि ‘वेदांता हॉस्पिटल’ को नियमों को दरकिनार कर को CTE और CTO जारी कर रखे हैं।
काबिलगौर रहे कि जब तक किसी जमीन की CLU ना हो जाए, तब तक पॉल्यूशन बोर्ड संबंधित संस्थान को CTE और CTO जारी नहीं कर सकता। बावजूद इसके बोर्ड द्वारा अपने ही नियमों को ताक पर रखकर CTE और CTOजारी कर दिए जाते हैं, जैसा कि ‘वेदांता हॉस्पिटल’ के केस में भी है।
यहीं नहीं, ऐसे संस्थानों की NOC को लेकर अग्निशमन/फायर विभाग भी शक के दायरे में है जोकि मोटी-मोटी रकम लेकर ऐसे संस्थानों को NOC जारी कर देता है। फर्क सिर्फ इतना है कि रिकार्ड में उनकी कैटैगरी चेंज कर दी जाती है।
इन सभी मामलों को लेकर विजिलेंस और सीएम फ्लाईंग में भी जांच जारी है। -क्रमश:






