Metro Plus News
फरीदाबादराजनीतिहरियाणा

नारी शक्ति के अधिकारों का विरोध मातृशक्ति के अपमान की मानसिकता: विपुल गोयल

Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।

Faridabad, 20 अप्रैल: नारी किसी भी समाज की आधारशिला होती है और जिस समाज में महिलाओं को सम्मान, अधिकार और निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है, वही समाज वास्तविक में प्रगति करता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नारी सशक्तिकरण केवल एक सामाजिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास की अनिवार्य शर्त है। फिर भी जब महिलाओं के अधिकारों और उनकी भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीति होती है तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि देश नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक नई दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है, जहां नारी शक्ति को केवल सुरक्षा नहीं बल्कि अधिकार और निर्णय लेने की शक्ति देने पर जोर दिया जा रहा है। यह सोच भारत की परंपरा और आधुनिकता दोनों का समन्वय है। सरकार की नीतियों का उद्वेश्य स्पष्ट है कि महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी का अवसर मिले और वे केवल सहभागी नहीं बल्कि नेतृत्वकर्ता बनें।

पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास किए गए हैं। यह परिवर्तन केवल कागजों तक सीमित नहीं है बल्कि जमीन पर दिखाई दे रहा है। महिलाएं आज प्रशासन, विज्ञान, खेल, व्यापार और राजनीति जैसे हर क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि जब अवसर और विश्वास मिलता है तो नारी शक्ति किसी भी चुनौती को पार कर सकती है।

ऐसे समय में जब देश नारी सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है तब विपक्ष के कुछ राजनीतिक दलों द्वारा इसका विरोध करना उनकी संकीर्ण सोच को दर्शाता है। विपक्ष को यह समझना चाहिए था कि नारी शक्ति के अधिकार और उनकी निर्णयों में भागीदारी हमारी लोकतांत्रिक संस्कृति को और सशक्त करती है। यह केवल महिलाओं का विषय नहीं है बल्कि पूरे समाज के संतुलित और समावेशी विकास का प्रश्न है।

हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री के रूप में मेरा मानना है कि नारी शक्ति का अपमान किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि यह हमारे सामाजिक मूल्यों के खिलाफ भी है। हमारी सरकार नारी शक्ति के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के लिए पूरी तरह संकल्पित है और इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

यह भी आवश्यक है कि हम केवल सरकार पर निर्भर न रहें बल्कि समाज के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी समझें। जब तक हम अपनी सोच में बदलाव नहीं लाएंगे तब तक वास्तविक सशक्तिकरण संभव नहीं है। हमें अपनी बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास और निर्णय लेने की स्वतंत्रता भी देनी होगी। परिवार और समाज का सहयोग ही महिलाओं को आगे बढऩे की सच्ची ताकत देता है।

आज देश की जनता जागरूक है और वह यह समझती है कि कौन नारी सम्मान के साथ खड़ा है और कौन इसके खिलाफ, आने वाला समय यह तय करेगा कि समाज किस दिशा में आगे बढ़ेगा लेकिन यह निश्चित है कि नारी शक्ति को अब रोका नहीं जा सकता।

Related posts

पृथ्वी पर उपलब्ध समस्त ऐश्वयों के स्वामी हैं महाराजा अग्रसेन: कथावाचक नर्मदा शंकर

Metro Plus

सब्जी मंडी खुली रहेंगी, लोग ना हों परेशान!

Metro Plus

थैलेेसीमियाग्रस्त बच्चों के साथ बांटे अपनी खुशी: जितेंद्र भाटिया

Metro Plus