Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट।
Chandigarh, 20 अप्रैल: हरियाणा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ० सुमिता मिश्रा ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राज्य की चिरायु योजना की प्रगति के आकलन को लेकर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता और क्लेम प्रक्रिया को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। डॉ० सुमिता मिश्रा ने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत थर्ड-पार्टी ऑडिट अनिवार्य किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोका जा सके और पूरी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर को सख्त दिशा-निर्देश देने को कहा गया।
डॉ० सुमिता मिश्रा ने कहा कि किडनी के मरीजों के लिए क्रोनिक हीमोडायलिसिस, जो एक जरूरी और बार-बार होने वाला इलाज है, उसके लिए आयुष्मान भारत स्कीम के तहत सक्रिय दावा किया जाना चाहिए, ताकि यह पक्का हो सके कि रेगुलर डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों को बिना किसी पैसे की परेशानी के पूरा कवरेज मिले। समीक्षा में बताया गया कि हरियाणा ने आयुष्मान भारत और चिरायु स्कीम के तहत लगभग 28 लाख क्लेम निपटाए हैं और पूरे राज्य में लाभार्थियों को 3,900 करोड़ रूपये से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी गई है। राज्य में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए क्लेम 1,500 करोड़ रूपये से ज्यादा हो गए हैं, जो लोगों में स्कीम के बारे में बढ़ती जागरूकता और उपयोग को दिखाता है।
राज्य में कुल 1,363 पैनल वाले अस्पतालों प्राइवेट (777) पब्लिक (586) का नेटवर्क है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के संस्थान शामिल हैं, जिससे पूरे हरियाणा में लाभार्थियों को कैशलेस इलाज मिल सके।
हरियाणा ने चिरायु योजना और इसके एक्सटेंशन को लागू करके राष्ट्रीय आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई रूपरेखा से आगे बढ़कर काम किया है। इसमें 3 लाख रूपये तक की सालाना इनकम वाले परिवार शामिल हैं। इससे राष्ट्रीय पात्रता मानदंडों से परे स्वास्थ्य सेवा सुरक्षा नेट से भी ज्यादा बढ़ गया है और राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा सुनिश्चित स्वास्थ्य कवरेज के तहत आ गया है। पात्र लाभार्थियों के लगभग 1.38 करोड़ कार्ड बनाए गए हैं।





