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DC-SDM सहित प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं द्वारा बहुरंगी बत्ती के खुलेआम प्रयोग पर उठ रहे हैं सवाल!

परिवहन विभाग द्वारा प्रदेशभर में वाहनों पर बहुरंगी बत्ती के प्रयोग करने हेतु स्वीकृत प्राधिकारियों की सार्वजनिक सूचना आज तक जारी नहीं
Metro Plus से Naveen Gupta की रिपोर्ट
Chandigarh, 5 सितंबर:
गत् सवा 12 वर्षो से केंद्र में सत्तासीन नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा मई, 2017 में देशभर के सरकारी वाहनों पर लालबत्ती (रेड बीकन) लगाने सम्बन्धी अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही वीआईपी संस्कृति को पूर्णतया समाप्त करने हेतु लिए गये ऐतिहासिक निर्णय के बाद हरियाणा प्रदेश की अफसरशाही और राजनेताओं द्वारा अपने सरकारी वाहनों पर लालबत्ती के स्थान पर मल्टीकलर (बहुरंगी) बत्ती का प्रयोग कर एक अलग ढंग से समाज में वीआईपी व्यवस्था को प्रमोट किया जा रहा है एवं दुर्भाग्यवश प्रदेश सरकार का परिवहन विभाग आज एक इस विषय पर सख्त कार्रवाही करने में असफल रहा है।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और प्रशासनिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने तीन माह पूर्व जून, 2026 में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, मंत्रालय के सचिव वी.उमाशंकर, हरियाणा के राज्यपाल आशीम कुमार घोष, मुख्यमंत्री नायब सैनी, परिवहन मंत्री अनिल विज, विभाग के प्रशासनिक सचिव और स्टेट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, सभी मंडलों आयुक्तों, जिलों के उपायुक्तों सहित हर जिले के डीटीओ कम आरटीए सचिव को विस्तृत कानूनी ज्ञापन भेजकर प्रदेश में सरकारी वाहनों पर मल्टीकलर (बहुरंगी) बत्तियों के अनियंत्रित प्रयोग पर गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि आज तक इस मामले में वांछित कार्रवाई करना तो दूर कोई जवाब तक नहीं दिया गया।

एडवोकेट हेमंत ने बताया कि केंद्र सरकार के सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आज से सवा नौ वर्ष पूर्व 1 मई, 2017 को केंद्र सरकार के गजट में प्रकाशित एक नोटिफिकेशन के बावजूद हरियाणा में सरकारी वाहनों पर बहुरंगी (लाल-नीली-सफेद) बत्तियां का बे-रोकटोक प्रयोग हो रहा है, जबकि इनके उपयोग की अनुमति केवल आपदा प्रबंधन, अग्निशमन, पुलिस, रक्षा एवं अर्धसैनिक बलों से जुड़े विशेष आपातकालीन कार्यों अर्थात कुछ विशेष परिस्थितियों में ही सीमित है।

9 वर्षों में एक बार भी नहीं जारी हुई सार्वजनिक सूची:-
हेमंत ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया है कि केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी एक अन्य अधिसूचना के अनुसार हर राज्य परिवहन विभाग द्वारा प्रतिवर्ष उन सभी अधिकृत प्राधिकारियों की सूची सार्वजनिक करनी आवश्यक है जिन्हें सरकारी वाहनों पर बहुरंगी बत्ती का प्रयोग करने की अनुमति दी गई है। उन्होंने दावा किया कि उनकी जानकारी के अनुसार हरियाणा के परिवहन विभाग ने गत नौ वर्षों में ऐसी कोई वार्षिक सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गयी है और यदि जारी की गई हो तो उसे आम जनता की पहुंच अर्थात सार्वजानिक पटल में उपलब्ध नहीं कराया गया है।

यहीं नहीं, केंद्र सरकार द्वारा जारी उपरोक्त नोटिफिकेशन में यह भी उल्लेख किया गया है कि बहुरंगी बत्ती का प्रयोग करने के लिए स्वीकृत प्राधिकारियों को अपने सरकारी वाहन की विंडस्क्रीन पर सम्बंधित प्रदेश के ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा जारी विशेष स्टीकर भी प्रदर्शित करना होगा जिसमें प्रदेश सरकार का नाम, उस सरकारी प्राधिकारी का दर्जा और वाहन का नंबर का उल्लेख होगा। एक समय पर किसी प्राधिकारी को एक ही ऐसा स्टीकर जारी किया जाएगा एवं वह स्टीकर सुरक्षा मुद्रिक वाटर मार्क पेपर पर होगा और उसके साथ साथ सम्बंधित प्रदेश के परिवहन विभाग का विशेष होलोग्राम भी होगा।

DC-SDM सहित कई अधिकारियों के वाहनों पर सवाल:-
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कमिश्नरों (डीसी) तथा अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के वाहनों पर भी ऐसी बहुरंगी बत्तियां लगी देखी जाती हैं। केवल मजिस्ट्रेटी शक्तियां होने मात्र से किसी अधिकारी को इन बत्तियों के उपयोग का वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता क्योंकि केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

पूरे प्रदेश में सत्यापन अभियान चलाने की अपील:-
एडवोकेट ने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की है कि अधिकृत वाहनों की वार्षिक सार्वजनिक सूची तत्काल जारी की जाए। सूची को सरकारी वेबसाइटों और समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए। पूरे हरियाणा में विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाए।

अनधिकृत वाहनों से मल्टीकलर लाल-नीली-सफेद बत्तियां तुरंत हटाई जाएं।:-
नियमों के उल्लंघन और अधिसूचना के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरूद्व कार्रवाई की जाए।

कानून से ऊपर कोई नहीं:-
हेमंत ने कहा कि यह मामला केवल वाहनों पर लगी बत्तियों का नहीं बल्कि संवैधानिक शासन, प्रशासनिक पारदर्शिता, कानून के समक्ष समानता और केंद्र सरकार के कानूनों के ईमानदार क्रियान्वयन का है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में वीआईपी लालबत्ती संस्कृति समाप्त करने का उद्देश्य यही था कि लोकतंत्र में कोई भी सार्वजनिक पदाधिकारी स्वयं को आम नागरिकों से ऊपर न समझे। ऐसे में नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार की विशेष पहचान या विशेषाधिकार की अनुमति लोकतांत्रिक भावना के विपरीत होगी।

बड़ी जांच की मांग से प्रशासन में हलचल:-
इस कानूनी ज्ञापन के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या हरियाणा में बहुरंगी (लाल-नीली-सफेद) बत्तियों के उपयोग संबंधी केंद्र सरकार के नियमों का पूरी तरह पालन हो रहा है और क्या परिवहन विभाग ने अधिसूचना के तहत अपनी वैधानिक जिम्मेदारियां निभाई हैं। यदि नहीं, तो आने वाले दिनों में यह मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर व्यापक चर्चा का विषय बन सकता है।

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