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रिहायशी नक्शे पर निर्माणाधीन बहुमंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंगों के बिल्डर ठेकेदार लगा रहे हैं निगमायुक्त के आदेशों को पलीता। देखें कैसे?

मैट्रो प्लस से नवीन गुप्ता की रिपोर्ट
फरीदाबाद, 28 जून:
अवैध निर्माणों के खिलाफ लगता है निगमायुक्त यादव ने एक बार फिर से मुहिम छेड़ दी है। कम से कम सोमवार को तीन-चार इमारतों पर हुई निगम की कार्यवाही को देखकर तो ऐसा ही लगता है। हालांकि साथ में ये भी कहा जा रहा है कि सोमवार को जिन इमारतों पर तोडफ़ोड़ की कार्यवाही हुई, वह विजिलेंस और सीएम फ्लाईंग को मिली शिकायतों को लेकर हुई। अब सच क्या है, ये तो कार्यवाही करने-करवाने वाले जानें या फिर जिन पर कार्यवाही हुई, वो जानें।
लेकिन यहां एक सवाल यह खड़ा होता है कि निगम अधिकारियों ने निगमायुक्त यादव के आदेशों पर सोमवार को लगभग पूरी हो चुकी रिहायशी इमारतों पर तो JCB का पीला पंजा और हैमर चल गया, लेकिन निगमायुक्त को अंधेरे में रखकर उन बिल्डिंगों पर इन तोडफ़ोड़ के अधिकारियों ने झांका तक नहीं जहां अवैध रूप से बहुमंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंगों का निर्माण कार्य दिन-रात चल रहा है। नेहरू ग्राऊंड में आर्य समाज रोड़ पर इस प्रकार की कई कॉमर्शियल इमारतों का निर्माण कार्य जारी है जिनमें सी-8, आर्य समाज रोड़, नेहरू ग्राऊंड भी शामिल हैं जोकि अवैध निर्माण का जीता-जागता प्रमाण है। कहने को तो इस इमारत को बनाने वाले बिल्डर ठेकेदार जोकि निगम अधिकारियों को अपनी जेब में रखने का दावा करता है, ने इस इमारत का नक्शा निगम से पास करवा रखा है वो बात अलग है कि नक्शा कॉमर्शियल बिल्डिंग की बजाए अधिकारियों की आखों में धूल झोकने के लिए रिहायशी पास करवा रखा है। इस इमारत को लेकर जब निगम के तोडफ़ोड़ विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने दबी जुबान में माना कि सैटिंग और अधिकारियां के दबाव के चलते उक्त अवैध इमारत का निर्माण कार्य बेरोकटोक जारी है।
अब बात करें उक्त बिल्डर ठेकेदार की तो इसे अवैध निर्माण करने में महारत हासिल है। एनआईटी जोन में उक्त बिल्डर ठेकेदार ने एक नहीं कई-कई अवैध बहुमंजिला कॉमर्शियल बिल्डिंगों का निर्माण किया है। ऐसा नहीं हैं कि इसके अवैध निर्माण पर निगम ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसके अवैध निर्माणों को निगम ने सील भी किया है, वो बात अलग है कि चंद निगम अधिकारियों से मिलीभगत और अफसरशाही में बैठे कुछ भ्रष्ट्र अधिकारियों के बलबुते पर वो सीलें खुल गई और वहां आज कॉमर्शियल गतिविधियां खुलेआम चल रही हंै।
मजे की बात तो यह है कि इस बिल्डर ठेकेदार की अधिकारियों से सांठगाठ का पता तो इसी से चल जाता है निगम द्वारा सील की गई बिल्डिंग को डी-सील करने की एप्लीकेशन तो 10 तारीख में लगती है, लेकिन उसको बिना किसी आधार या संबंधित दस्तावेज लिए डी-सील करने के आदेश 6 तारीख में ही हो जाते हैं। इस मामले का खुलासा भी सबुत सहित मैट्रो प्लस द्वारा जल्द किया जाएगा।

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