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नोटों की चमक के आगे निगम अधिकारियों को नजर नहीं आते हैं कोर्ट के आदेश

अदालत के आदेशों को खेल समझ रहे हैं नगर निगम के अधिकारी
नवीन गुप्ता
फरीदाबाद, 17 नवम्बर:
लगता है अदालत की अवमानना में हाल ही में पांच अधिकारियों को मिली सजा से नगर निगम के अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया है। शायद यहीं कारण है कि अदालत के स्टे्टस-को के आदेशों को भी ठेंगा दिखाते हुए रातों-रात एसएसआई के प्लॉट पर बिना किसी सीएलयू के व बिना नक्शा पास कराए अवैध कॉमर्शियल बिल्डिंग खड़ी कर दी गई और नगर निगम के अधिकारी पैसों की चकाचौंध के आगे नतमस्तक खड़े दिखाई दिए। इस मामले में निगम अधिकारियों ने यह भी खौ$फ नहीं हैं कि कल को उन्हें भी अदालत की अवमानना में सजा का सामना करना पड़ सकता है। उक्त मामले को देखते हुए तो लगता है कि इन निगम अधिकारियों के सामने नोटों की गड्डियों के आगे सजा के कोई मायने नहीं हैं। जिन्होंने कि ईमान को बेचकर अपने फर्ज को तिलांजलि दे डाली।
गौरतलब रहे कि एनआईटी क्षेत्र की एनएच-5 मार्किट में शिव मंदिर रोड़ पर मित्तल कॉम्पलैक्स के पास स्माल स्कैल इंडस्ट्रीज (एसएसआई) के करीब 680 वर्ग गज के प्लॉट न०-6 पर अदालत ने स्टेट्स-को जारी किया हुआ है। इन आदेशों के अनुसार इस प्रोपर्टी पर स्टेट्स-को के होने तक वहां ना तो किसी भी प्रकार का कोई निर्माण हो सकता है और ना ही उसके वर्तमान स्वरूप में कोई छेड़छाड़ की जा सकती है। बावजूद इसके जिस तरीके से इस विवादास्पद प्रोपर्टी पर रातों-रात अवैध निर्माण कर बिल्डिंग खड़ी कर सरेआम अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाई गई, उसने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्रचिन्ह लगाते हुए उन्हें कठघरे में भी खड़ा कर दिया है।
यहां सवाल यह भी उठता है कि एक तरफ तो नगर निगम के अधिकारी कोर्ट से स्टे होने के बावजूद भी तोडफ़ोड़ करने से नहीं चूकते जैसा कि विपुल गोयल वाले मामले में हुआ वहीं अपने लालच के वशीभूत होकर किसी भी प्रकार के निर्माण पर स्टे्टस-को के आदेशों के बावजूद भी बिना किसी सीएलयू के व बिना नक्शा पास कराए पूरी की पूरी अवैध ईमारत खड़ी करा देते हैं वो भी सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगवाते हुए, यह कहां का न्याय है?
उपरोक्त अवैध निर्माण के मामले में तोडफ़ोड़ विभाग के संबंधित एसडीओ पद्मभूषण ने यह तो माना है कि उक्त बिल्डिंग अदालत के स्टे्टस-को के आदेशों के बावजूद बिना किसी सीएलयू के व बिना नक्शा पास कराए अवैध रूप से बन रही है। एसडीओ पदमभूषण का यह भी कहना था कि उन्होंने अवैध निर्माणकर्ता से कोर्ट के आदेशों की कॉपी मांगी है, जिसे मिलने के बाद वह कानूनी रॉय लेकर ही कोई कदम उठाएंगें। लेकिन कार्यवाही करने के नाम पर वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और अवैध निर्माणकर्ता को नोटिस देने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया।
इस मामले में फिलहाल नगर निगम के निगमायुक्त एवं जिला उपायुक्त डॉ० अमित अग्रवाल से उनका पक्ष जानना चाहा तो बार-बार सम्र्पक करने के बाद भी उनसे बात नहीं हो सकी।
हम आपको यहां यह बात भी बता दे कि एसडीओ पदमभूषण के बारे में शहर में यह आम प्रचलित है कि उसकी मर्जी के बगैर एनआईटी क्षेत्र में अवैध निर्माण करना तो दूर कोई अपनी दीवार तक नहीं खड़ी कर सकता। अवैध निर्माण स्थल पर जेसीबी भेजकर अपनी फीस भी डबल करने में इसे महारत हासिल है।
वहीं दूसरी तरफ इस मामले में आरटीआई एक्टिीविस्ट महेश चंद का कहना है कि वो इस मामले से कोर्ट को अवगत कराएंगें तथा दोषी अधिकारियों तथा संबंधित लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला दर्ज कराएंगे।
इस सारे प्रकरण से जाहिर होता है कि नगर निगम अधिकारियों ने यह ठान ली है कि हम नहीं सुधरेंगे।
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